उत्तराखंड पुलिस की एक पहल से संवर गई 16 भिखारियों की जिंदगी,जानिए कैसे ?

उत्तराखंड पुलिस की एक पहल से संवर गई 16 भिखारियों की जिंदगी,जानिए कैसे ?

उत्तराखंड पुलिस की एक पहल से संवर गई 16 भिखारियों की जिंदगी।

हरिद्वार(अरुण शर्मा)। मेला पुलिस की एक पहल से बदल गई भिखारियों की जिंदगी, सम्मान से जीने का मिला हक।

हरिद्वार कुंभ मेला पुलिस की पहल में 16 भिखारियों को न केवल रोजगार परक बनाया गया उन्हें सम्मान से जीना भी सिखाया गया।

आई जी कुम्भ संजय गुंज्याल की सोच का यह परिणाम है जिसने भिखारियों को बदल कर रख दिया।

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जनवरी में कुंभ मेला पुलिस ने हर की पैड़ी एवं आसपास के क्षेत्र को भिक्षुक मुक्त बनाने का अभियान चलाया गया।

अपने आप मे इस अनोखे अभियान में उत्तराखंड पुलिस की मानवीय पहल *भिक्षा नही शिक्षा* के तौर पर चलाया गया।

अभियान का उद्देश्य पकड़े गए भिक्षुक के जीवन में इस प्रकार का परिवर्तन लाना था, जिससे कि वह भिक्षावृत्ति त्याग कर सम्मानजनक जीवन जीने के लिए प्रेरित हो।

उत्तराखंड पुलिस की एक पहलअभियान का नेतृत्व आई जी मेला संजय गुंज्याल को सौंपा गया।

सर्वप्रथम कुंभ मेला पुलिस द्वारा चौकी हर की पैड़ी पुलिस की सहायता से लगातार अभियान चलाकर हर की पेडी एवं आसपास के क्षेत्रों में भीख मांग रहे 183 भिक्षुकों को भिक्षुक गृह भेजा गया।

स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टरों की टीम द्वारा उनका कोरोना से संबंधित रैपिड एंटीजन टेस्ट करा गया।

भिक्षुकों को बताया गया कि जो लोग कोई काम सीखने के इच्छुक हैं उन्हें उनकी योग्यता एवं शारीरिक स्थिति के

अनुसार भिक्षुक गृह की अभिरक्षा अवधि में और उसके बाद भी कोई हाथ का हुनर वाला काम सिखाया जाएगा

ताकि वह स्वरोजगार कर सम्मान पूर्वक अपना जीवन यापन कर सकें।

भिक्षुक गृह में अभिरक्षा अवधि के दौरान पुलिस मैस केउत्तराखंड पुलिस की एक पहल विशेषज्ञ कुकों (chef) के द्वारा इच्छुक भिक्षुकों को खाना बनाने के गुर सिखाए गए।

अभिरक्षा अवधि पूरी होने पर इन 183 भिक्षुकों में से 16 भिक्षुक ऐसे थे जो अभिरक्षा अवधि पूरी होने के बाद सम्मानजनक जीवन जीने के पुलिस के बताए रास्ते पर आगे बढ़ना चाहते थे।

इन सभी 16 भिक्षुकों को अच्छा व्यवसायिक प्रशिक्षण देने के लिए सिडकुल में स्थित होटल रेडिसन प्रबंधन से वार्ता की गई।

होटल रेडिसन प्रबंधन के द्वारा इस मानवीय कार्य मे सहर्ष सहभागिता करने की इच्छा जाहिर की गई और अपने पेशेवर सेफ और कर्मचारियों से 16 भिक्षुकों को होटल व्यवसाय का प्रशिक्षण दिया गया।

फरवरी माह में प्रशिक्षण पूरा होने पर इन सभी 16 भिक्षुकों को थाना/चौकी और पुलिस लाइन की मेसों में संविदा पर कार्य पर लगा दिया गया।

इसी दौरान इन सभी भिक्षुकों के आधार कार्ड बनवाकर इनके बैंक खाते खुलवाए गए।

वर्तमान में इन सभी नए भिक्षुक पुलिस कार्मिकों को अपना मासिक वेतन अपने खातों पर प्राप्त हो चुका है।

इनमें से कुछ भिक्षुकों के द्वारा अपनी पहली कमाई का कुछ अंश अपने घर भी भेजा गया है।

 

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