जियोग्राफिकल मैपिंग से पता चलेगा ब्लॉक टनल में फसे मजदूरों का हाल,जानिए इसकी खासियत

जियोग्राफिकल मैपिंग से पता चलेगा ब्लॉक टनल में फसे मजदूरों का हाल,जानिए इसकी खासियत

जियोग्राफिकल मैपिंग से पता चलेगा ब्लॉक टनल में फसे मजदूरों का हाल

चमोली(अरुण शर्मा)। SDRF रेस्क्यू ऑपरेशन में तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।

जियोग्राफिकल मैपिंगब्लाक हुई टनल में जियोग्राफिकल मैपिंग का इतेमाल कर स्थिति का पता लगाया जा रहा है।

यही नही ड्रोन और हॉलिकॉप्टर के जरिये SDRF राहत सामग्री भेजने का काम कर रही है।

रेणी तपोवन क्षेत्र में आई भीषण आपदा में राहत एवम बचाव कार्य युद्ध स्तर में चल रहा है।

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SDRF सहित देश की अनेक एजेंसियां राहत कार्य मे लगी हुई है।

ग्लेशियर टूटने और ऋषिगंगा प्रोजेक्ट के क्षतिग्रस्त होने से आये जल सैलाब ने श्रीनगर डेम क्षेत्र तक अपना प्रभाव दिखाया।

SDRF ने पूरी ताकत से रेस्कयू कार्य आरम्भ किया साथ ही SDRF ने सर्चिंग के लिए भी युद्धस्तर पर कार्य किया।

श्रीनगर क्षेत्र में मोटरवोट एवम राफ्ट से सर्चिंग आरम्भ की, वहीं अनेक टुकड़ियों ने नदी तटों पर तलाश जारी रखी।

अभी तक SDRF ने अलग अलग स्थानों से लगभग 32 शवों को खोज सिवि है ।

सर्चिंग में गति लाने के लिए SFRF के द्वारा ड्रोन सर्चिंग एवम डॉग स्क्वाड की भी मदद ली जा रही है।

SDRF टीमों के द्वारा प्रभावित रेणी गाँव मे जाकर ग्रामीणों के लिए रसद पहुचाई।

जबकि *सेनानायक SDRF नवनीत भूल्लर द्वारा ग्रामीणों से वार्ता कर समस्याओं को जाना औरतत्काल ही निराकरण हेतु आदेश किये।

दूसरी टनल में फंसे लगभग 30 से 35 मजदूरों तक पहुंचने का मार्ग अभी भी बंद है।

सभी एजेंसियां रास्ते को साफ कर मजदूरों तक पहुँच बनाने का प्रयास कर रही है।

इस सर्चिंग को अंजाम तक पहचानें के लिए आज *DIG SDRF उत्तराखंड पुलिस रिद्धिम अग्रवाल द्वारा विशेष प्रकार की तकनीक के इस्तेमाल का आदेश दिया।

क्या है ब्लॉक टनल में प्रयोग यह तकनीक….

इस तकनीक में ड्रोन और हॉलिकॉप्टर के जरिए ब्लॉक टनल का जियोग्राफिकल मैपिंग कराई जा रही है।

जिसमें रिमोट सेंसिंग के जरिए टनल की ज्योग्राफिकल मैपिंग कराई जाएगी।

टनल के अंदर मलवे की स्थिति के अलावा और भी कई तरह की जानकारियां स्पष्ट हो पाएंगे।

इसके अलावा थर्मल स्कैनिंग या फिर लेजर स्कैनिंग के जरिए तपोवन में ब्लॉक टनल के अंदर फंसे कर्मचारियों के होने की कुछ जानकारियां भी एसडीआरएफ को मिल पाएगी।

इसमें कई तकनीकों के जरिए चमोली तपोवन में ब्लॉक टनल के अंदर पहुंचने का काम किया जा रहा है।

वही डाटा कलेक्शन के लिए ड्रोन और हॉलिकॉप्टर के माध्यम से कई एजेंसियों को अलग-अलग तकनीकों के माध्यम से अंदर की जानकारियां कलेक्ट करने की जिम्मेदारी दी गई है।

वर्तमान में साइंटिस्ट मैंपिंग से प्राप्त डिजिटल संदेशों को पढ़ने ओर समझने की कोशिश कर रहे हैं ।

कैसे होती है टनल की जियोग्राफिकल मैपिंग–

जब भी किसी जगह पर टनल बनाई जाती है तो उससे पहले भी उस जमीन की भौगोलिक संरचना को समझने के लिए इसी तरह के सर्वे कराए जाते हैं।

उत्तराखंड लोक निर्माण विभाग में मौजूद एक वरिष्ठ इंजीनियर ने बताया कि जब भी किस जगह पर टनल बनाई जाती है।

तो रिमोट सेंसिंग के जरिए वहां की ज्योग्राफिकल मैपिंग की जाती है।

जिससे जमीन के अंदर की भौगोलिक संरचना से संबंधित डाटा उपलब्ध होता है।

साथ ही उन्होंने बताया कि जमीन के अंदर की वस्तुस्थिति को अधिक सटीकता से समझने के लिए ड्रोन से जिओ मैपिंग के जरिए अधिक जानकारियां मिलती है।

इसके अलावा जमीन के अंदर मौजूद किसी जीवित की जानकारी के लिए थर्मल स्कैनिंग की जाती है।

लेकिन थर्मल स्कैनिंग का दायरा बेहद कम होता है इसके लिए लेजर के जरिए स्कैनिंग की जाती है।

जिसे से जमीन के नीचे की थर्मल इमेज हमे मिल पाती है।

admin

2 thoughts on “जियोग्राफिकल मैपिंग से पता चलेगा ब्लॉक टनल में फसे मजदूरों का हाल,जानिए इसकी खासियत

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