सीएम त्रिवेंद्र का दिल्ली दौरा -‘सौगात’ और ‘भरोसा’ लेकर लौटे सीएम

सीएम त्रिवेंद्र का दिल्ली दौरा -‘सौगात’ और ‘भरोसा’ लेकर लौटे सीएम

सीएम त्रिवेंद्र का दिल्ली दौरा-‘सौगात’ और ‘भरोसा’ लेकर दिल्ली से लौटे सीएम त्रिवेन्द्र

दिल्ली(ब्यूरो)। सीएम त्रिवेंद्र के दिल्ली दौरा उत्तराखंड के लिए एक बार फिर इतिहास रचने का काम कर गया।

सीएम त्रिवेंद्र के इस दिल्ली दौरा उत्तराखंड के सीएम का ऐसा पहला दौर है जिसमे पीएम मोदी
सहित 6 केंद्रीय मंत्रियों से इटनर कम समय मे मुलाकात की हो।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत की पहचान एक सुलझे हुए राजनेता के रूप में है।

जो अक्सर लीक से हटकर काम करने के लिए जाने जाते हैं। उनका हालिया दिल्ली दौरा काफी चर्चा में है।

जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ ही तमाम केन्द्रीय मंत्रियों से मुलाकातें कीं।
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संभवतया किसी प्रदेश के वह पहले ऐसे मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने एक संक्षिप्त दिल्ली के दौरे में 6 केन्द्रीय मंत्रियों से न सिर्फ सिलसिलेवार भेंट की बल्कि वह उनसे उत्तराखण्ड के लिए कुछ न कुछ सौगात भी ले आये।

हर एक राजनेता ने सीएम त्रिवेन्द्र का दिल खोलकर स्वागत किया।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत का दिल्ली दौरा बीते 21 फरवरी की शाम को शुरू हुआ।

देर शाम उन्होंने ‘उत्तराखण्ड सदन’ दिल्ली में उत्तराखण्ड के हस्तशिल्प उत्पादों को बढ़ावा देने के मकसद से हिमाद्रि एम्पोरियम के आउटलेट का उद्घाटन किया।

इसके बाद 22 फरवरी और 23 फरवरी को उन्होंने केन्द्रीय मंत्रियों से मिलने की शुरुआत केंद्रीय संचार, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री रविशंकर प्रसाद से की।

केंद्रीय नागरिक उड्डयन और शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह,

केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी, केंद्रीय रेल तथा वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल,

से होते हुय मंत्रियों से मुलाकात का यह सिलिसला रक्षामंत्री श्री राजनाथ सिंह से भेंट पर खत्म हुआ।

सीएम त्रिवेंद्र का दिल्ली दौरा

सीएम त्रिवेंद्र का दिल्ली दौरा
मंत्रियों से मुलाकात के दौरान उनके विभागों से सम्बंधित योजनाओं और नए प्रस्तावों का जिक्र मुख्यमंत्री ने सलीके से किया।

उन्होंने बताया कि केन्द्र की योजनाओं की उत्तराखण्ड में धरातल पर क्या स्थित है और राज्य की अगली जरूरतें क्या हैं।

केन्द्रीय मंत्रियों ने भी मुख्यमंत्री श्री त्रिवेन्द्र को खाली हाथ नहीं लौटाया।

भारत सरकार की ओर से उत्तराखंड में भारत नेट 2.0 प्रोजेक्ट को शुरू करने की स्वीकृति प्रदान करना,

चारधाम क्षेत्र की डिजिटल कनेक्टिविटी को मजबूत बनाने पर सहमति, उड़ान योजना में देहरादून-पिथौरागढ़-हिण्डन मार्ग

और सहस्त्रधारा-चिन्यालीसौड़-गौचर मार्ग पर हवाई सेवाएं नियमित करने के लिए दोबारा टेंडर की अनुमति,

जल जीवन मिशन में उत्तराखंड के सभी बड़े और छोटे शहरों को शामिल किए जाने की स्वीकृति,

पंतनगर ग्रीन फील्ड हवाई अड्डे को अंतर्राष्ट्रीय स्तर का बनाए जाने पर सहमति,

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना-हर खेत को पानी के अंतर्गत उत्तराखंड में लगभग ₹350 करोड़ की 422 नई योजनाओं

और 06 सीवेज शोधन संयंत्र और सीवर लाइन (लगभग ₹229 करोड़) के प्रस्ताव सहित कई मामलों में मंजूरी,

वित्तीय वर्ष 2020-21 में केंद्रीय सड़क व अवस्थापना निधि के अंतर्गत मंत्रालय को प्रेषित ₹219 करोड़ के प्रस्तावों और अन्य मामलों की शीघ्र स्वीकृति का आश्वासन,

आईएसबीटी, देहरादून बस अड्डा की सडक परियोजना के लिए ₹48 करोड और रूद्रप्रयाग टनल निर्माण के लिए लगभग ₹225 करोड़ की स्वीकृति लेकर मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र देहरादून लौट आए हैं।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से भी उनकी तसल्ली से गुफ्तगू हुई।

मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने प्रधानमंत्री से लेकर मंत्रियों को उपहार के रूप में उत्तराखण्ड के स्थानीय उत्पाद भेंट कर

उनकी जबरदस्त ब्रांडिंग की। उनका दो दिन का दिल्ली प्रवास बहुत से लोगों की उस ग़लत धारणा को हमेशा-हमेशा के लिए दूर कर गया

जो यह मानते रहे कि ‘त्रिवेन्द्र सरकार 5 वर्ष का कार्यकाल पूरा कर भी पाएगी या नहीं’।

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