उत्तराखंड का लोकपर्व फूलदेई को मनाने के पीछे क्या है मान्यता ? पढ़े

उत्तराखंड का लोकपर्व फूलदेई को मनाने के पीछे क्या है मान्यता ? पढ़े

उत्तराखंड का लोकपर्व फूलदेई को लेकर उतसाह का मौहाल,आमोखास ने प्रकृति का किया आभार व्यक्त।

देहरादून(अरुण शर्मा)। उत्तराखंड का लोकपर्व फूलदेई को लेकर पूरे उत्तराखंड में उत्साह देखा गया।

आमोखास सभी ने इस लोकपर्व पर एक दूसरे को बधाई दी।

प्रकृति का आभार व्यक्त करने वाले इस लोक पर्व को लेकर राजधानी देहरादून में भी उत्साह देखा गया।

उत्तराखंड का लोकपर्व फूलदेई
उत्तराखंड का लोकपर्व फूलदेई

सीएम आवास से लेकर राज्यपाल भवन में भी इस लोकपर्व को बच्चो के साथ बड़ी धूमधाम से मनाया गया।

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने भागीरथीपुरम स्थित अपने आवास पर बच्चों के साथ प्रकृति का आभार प्रकट करने वाला पर्व फूलदेई मनाया।

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उन्होंने कहा कि यह पर्व प्रकृति के सरंक्षण एवं हमारी संस्कृति का द्योतक है।

प्रकृति के इस लोकपर्व एवं प्राचीन संस्कृति को संजोऐ रखने के लिए सबको प्रयास करने होंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बसंत ऋतु का यह पर्व सभी प्रदेशवासियों के जीवन में सुख-समृद्धि एवं खुशहाली लाये।

मुख्यमंत्री तीरथ ने कहा कि प्रकृति से जुड़ा फूलदेई का पर्व हमें पर्यावरण संरक्षण एवं प्रकृति के प्रति अपने कर्तव्यों की भी याद दिलाता है।

चैत्र माह के प्रारम्भ होने पर उत्तराखण्ड में यह पर्व बच्चों द्वारा हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।

बसंत के आगमन का द्योतक यह पर्व हमारी प्राचीन लोक संस्कृति एवं परंपराओं से जुड़ा है।

मुख्यमंत्री ने अपने आवास पर आए बच्चों को उपहार भेंट किये।

मननीय पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत जी ने आज उत्तराखण्ड का पारंपरिक लोकपर्व फूलदेई त्यौहार बच्चों के साथ मनाया।

प्रकृति के इस त्यौहार की बच्चों को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि प्रकृति संरक्षण, हमारी संस्कृति में है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बड़ी खुशी की बात है कि हमारे बच्चों में अपनी संस्कृति और परम्पराओं से लगाव बना हुआ है।

उन्होंने कहा कि हमें अपनी प्राचीन संस्कृति को संजोकर रखने की जरूरत है।

प्रकृति के इस त्यौहार को संजोए रखने के लिये सबको मिलकर प्रयास करने होंगे।

फूलदेई का त्यौहार सुख शांति की कामना का प्रतीक है। उन्होंने सभी को फूलदेई त्यौहार की शुभकामनाएं एवं बधाई दी हैै।

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