बेजुबान जानवरो के लिए देवदूत बनकर आई SDRF, ऑपरेशन वाकई कठिन था

बेजुबान जानवरो के लिए देवदूत बनकर आई SDRF, ऑपरेशन वाकई कठिन था

बेजुबान जानवरो के लिए देवदूत बनकर आई SDRF,दर्जनों गायों की बचाई जान।

 

देहरादून(कमल खड़का)। बेजुबान जानवरो के लिए देवदूत बनकर आई SDRF।

कई दिनों से फंसी गाय को बचाने के किये चलाया रेस्क्यू अभियान।

उत्तराखंड में केवल इंसानों के लिए ही नही अपितु बेजुबान जानवरो के लिए देवदूत बनने का काम SDRF कर रही है।

ऐसा ही एक ताजा मामला बागेश्वर जीके का है जंहा पर गहरी घाटी के विहड़ इलाके में कई दिनों से फंसी गायो के लिए SDRF ने बचाव अभियान चलाया।

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दरअसल चीरा बगड़ रोड से लगभग 3 किलोमीटर ऊपर जंगल काला पानी गधेरा में दर्जनों गाय फंसे हुए थे।

इस जगह पर कई दिनों से फंसी कई गायों की मौत हो गई थी जबकि कई मरने की कगार पर थी।

सूचना SDRF को मिली और SDRF तत्काल राहत और बचाव कार्य के लिये निकल पड़ी।

बेजुबान जानवरो के लिए देवदूत बनकर आई SDRF
बेजुबान जानवरो के लिए देवदूत बनकर आई SDRF

SDRF टीम स्थानीय ग्रामीणों के साथ जंगल मे पगडण्डियों भरे उबड़ खाबड़ रास्ते से लगभग 2 किमी की दूरी तय कर घटना स्थल पर पहुंचें।

घटना स्थल जंगल मे एक वीरान घाटी थी जहां एक बार पहुंच कर गो वंश का वापस आना आसान नही था।

टीम ने मौके पर देखा कि 6 गोवंश मृत अवस्था में थे जबकि 12 गोवंश पशु घायल ओर असहाय थे।

ये गोवंश लावारिस हालत में चारे की तलाश में गहरी खाई में फंसे थे।

सम्भवतः किसी की नजर न पड़ने से भूख प्यास से अत्यधिक कमजोर हो गए थे।

घायल गायों की स्थिति को देखते हुए जवानों के द्वारा वैकल्पिक मार्ग भी बनाया गया।

टीम द्वारा तत्काल ही ग्रामीणों की सहायता से 9 गोवंश को सुरक्षित निकाला, जबकि 03 अत्यधिक घायल होने के कारण खड़े होने में असमर्थ थे।

जिस कारण वहां निकालना आसान नही था इस दशा में स्थानीय समाजसेवी द्वारा वेटरनरी डॉक्टर से संपर्क किया।

मौके पर ही पशुओं का उपचार करने का अनुरोध एवम परामर्श दिया।

SDRF टीम द्वारा कल भी स्थानीय क्षेत्र में घाटी क्षेत्र में सर्चिंग की जाएगी।

साथ ही स्थानीय प्रशानिक अधिकारियों को भी उपरोक्त गोवंश रेस्कयू की जानकारी से अवगत कराया गया है।

SFRFउत्तराखंड पुलिस टीमों द्वारा मानसून काल मे अनेक गोवंश रेस्कयू किये जाते है।

जो गो वंश चारे की तलाश में तेज बहाव नदियों में नदी किनारे ओर टापुओं में फंस जाती।

यह प्रथम मामला है जो शीत ऋतु में इतनी बड़ी संख्या में गोवंश रेस्कयू किया गया।

विगत वर्ष टीम द्वारा 60 से भी अधिक गोवंश रेस्कयू किये थे।

सम्पूर्ण अभियान की स्थानीय स्तर पर अत्यधिक सराहना की जा रही है

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