हाइकोर्ट प्राइवेट डॉक्टरों पर सख्त, सरकार को दिए ये निर्देश

हाइकोर्ट प्राइवेट डॉक्टरों पर सख्त, सरकार को दिए ये निर्देश
हाइकोर्ट प्राइवेट डॉक्टरों पर सख्त, सरकार को दिए ये निर्देश
नैनीताल(कमल खड़का)। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने क्वारंटाइन सेंटरों की बदहाल व्यवस्थाओ को लेकर दायर जनहित याचिकाओं की सुनवाई हुई।
High Court ने हैल्थ सचिव से प्राइवेट प्रैक्टिस कर रहे Doctors पर अभी तक की गई कार्यवाही व गैर सरकारी अस्पतालों व क्लीनिक की संख्या बताने कहा है।
कोर्ट ने यह भी पूछा है कि गैर सरकारी हॉस्पिटल कोविड मरीजों को 25 प्रतिशत बैड उपलब्ध करा रहे है
या नही इसकी भी विस्तृत रिपोर्ट 6 मई तक पेश करने को कहा है
साथ ही कोर्ट ने हॉस्पिटलों में ICU और ऑक्सीजन बैडो की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए।
प्रदेश के कोविड अस्पतालों में सिटी स्केन लगाने को भी कहा है।
कोर्ट ने यह भी कहा है कि राज्य सरकार जिला निगरानी कमेटियों के सुझावों पर कितना अमल कर रही है
उसकी भी रिपोर्ट COURT में पेश करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई के लिए 10 मई की तिथि नियत की है।
सुनवाई के दौरान याचिकर्ता के अधिवक्ता द्वारा कोर्ट को बताया कि राज्य के कई हॉस्पिटलों में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी है।
न तो Hospitals में पर्याप्त बैड है और न ही स्वास्थ्य कर्मियों के पास पीपीई किट उपलब्ध है।
कोरोना पीड़ितों को लगने वाली रेमड़ेशीर इंजेक्शन उपलब्ध नही है।
याचिकर्ता ने यह भी कहा कि प्रदेश के दून अस्पताल व एसटीएच को छोड़कर और अन्य किसी अस्पताल में सिटी स्केन की सुविधा उपलब्ध नही है।
अस्पतालों में ऑक्सीजन व बेड़ो का अभाव है मरीजों से मोर्चरी तक फूल हो चुकी है
इसलिए बेड़ों की संख्या बढ़ाया जाए।आरटीपीसीआर टेस्ट करने की धीमी रफ्तार है इन्हें बढ़ाया जाए।
मामले के अनुसार अधिवक्ता दुष्यंत मैनाली व देहरादून निवासी सच्चिदानंद डबराल ने क्वारन्टीन सेंटरों व
कोविड अस्पतालों की बदहाली और उत्तराखंड वापस लौट रहे प्रवासियों की मदद
और उनके लिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने को लेकर हाईकोर्ट में अलग अलग जनहित याचिकायें दायर की थी।
पूर्व में बदहाल क्वारंटाइन सेंटरों के मामले में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट कोर्ट में पेश कर माना था
कि उत्तराखंड के सभी क्वारंटाइन सेंटर बदहाल स्थिति में हैं और सरकार की ओर से वहां पर प्रवासियों के लिए कोई उचित व्यवस्था नहीं की गई है।
जिसका संज्ञान लेकर कोर्ट अस्पतालों की नियमित मॉनिटरिंग के लिये जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में
जिलेवार निगरानी कमेटीया गठित करने के आदेश दिए थे और कमेटियों से शुझाव माँगे थे।

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