देहरादून(अरुण शर्मा)। उत्तराखंड चार धाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड में पुरोहितों को बड़ी राहत दी गई है।

अब पुजारियों या वंशागत पुजारियों का प्रतिनिधित्व करने के लिए बद्री-केदार, यमुनोत्री-गंगोत्री बोर्ड में तीन के बजाय पांच व्यक्तियों को शामिल किया जायेगा।

इसके अलावा चार धाम व समस्त धार्मिक स्थल की सम्पत्ति बोर्ड के अधीन चली जायेगी।

यह अधिनियम जिन धार्मिक स्थल पर लागू होता है उसकी सारी संपत्ति जो किसी भी सरकार, यह सरकारी संस्थान व व्यक्ति के कब्जे में है वह बोर्ड में निहित मानी जाएगी।

पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने जानकारी देते हुए बताया कि उत्तराखंड चार धाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड में अब तीन के बजाय पांच ख्याति प्राप्त व्यक्तियों (पुरोहितों) को राज्य सरकार द्वारा नामित किया जाएगा।

सतपाल महाराज ने बताया कि विधानसभा में प्रस्तुत चार धाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड संशोधन विधेयक के द्वारा अब उक्त व्यवस्था की गई है।

उन्होंने बताया कि बोर्ड में भारत सरकार के किसी मंत्रालय से दो विशेष आमंत्रित व्यक्ति जो कि संयुक्त सचिव स्तर के होंगे उन्हें भी नामित किये जाने का प्रावधान किया गया है।

पर्यटन मंत्री ने बताया कि अब चार धाम व समस्त धार्मिक स्थल जिन पर अधिनियम लागू होता है उनकी समस्त संपत्तियां जो कि राज्य सरकार, जिला पंचायत, जिला परिषद, नगर पालिका या किसी अन्य स्थान या किसी कंपनी सोसाइटी, संगठन, संस्था, समिति या अन्य व्यक्ति के कब्जे में हैं।

उस तारीख से जिस तारीख से बोर्ड का गठन हुआ है वह सभी संपत्तियां बोर्ड में निहित समझी जाएगीं।

सतपाल महाराज ने कहा कि रानीहाट चौरास, टिहरी गढ़वाल में राजराजेश्वरी देवी मंदिर को भी बोर्ड में शामिल किया गया है।

महाराज ने जानकारी देते हुए बताया कि चार धाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड भारतीय न्यास अधिनियम 1982 के अंतर्गत दान ग्रहण करने,

अधिनियम में उल्लेखित कार्यों के क्रियान्वयन एवं जनहित के अन्य कार्यों को करने के लिए यदि आवश्यकता पड़ती है तो एक न्यास का गठन भी कर सकता है।

 

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