डमी विधानसभा को लेकर बीजेपी और कांग्रेस
 

देहरादून(अरुण शर्मा)। डमी विधानसभा को लेकर बीजेपी और कांग्रेस आमने सामने हो गए है।

21 दिसम्बर से शुरू होने वाले उत्तराखंड विधान सभा सत्र की कम अवधि को लेकर कांग्रेस ने डमी विधानसभा का आयोजन किया।

जिसे बीजेपी ने लोकतंत्र का मजाक उड़ाने वाले बताया।

दरअसल कांग्रेस ने सत्र की कम अवधि के विरोध करने का यह तरीका निकाला था।

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जिसमे प्रदर्शन के द्वारा एक डमी विधानसभा गठित की गई जहाॅ विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष सत्ता पक्ष और विपक्ष के डमी विधायकों ने विधानसभा सत्र का नाटक मंचन किया।

मुख्यमंत्री बने राकेश,मदन की भूमिका में अनिल

इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका जयेन्द्र रमोला ने निभाई।

मुख्यमंत्री की भूमिका में राकेश नेगी, मदन कौशिक की भूमिका में अनिल भाष्कर ने विपक्ष के प्रश्नों का उत्तर दिया।

डमी विधानसभा को लेकर बीजेपी और कांग्रेस
डमी विधानसभा को लेकर बीजेपी और कांग्रेस

विपक्ष की ओर से जहाॅ गरिमा दसौनी ने नेता प्रतिपक्ष के रूप में हंगामेंदार प्रदर्शन किया वहीं जोत सिंह बिष्ट गोविन्द सिंह कुंजवाल की और संग्राम सिह पुण्डीर, हरीश धामी का किरदार निभाते दिखे।

गणेश गोदियाल ने भी अपनी ही शैली में सत्ता पक्ष पर जोरदार हमला बोला।

दसौनी ने कहा कि विधानसभा की नियामावली के अनुसार किसी भी राज्य में वर्षभर में विधानसभा सत्र 60 दिन चलना चाहिए।

परन्तु यह उत्तराखण्ड का दुर्भाग्य है कि जबसे भाजपा सत्ता पर काबिज हुई है सत्र की अवधि लगातार कम होते जा रही है।

जानकारी देते हुए दसौनी ने बताया कि 2017 में 3 सत्र मात्र 17 दिन के, 2018 में 3 सत्र मात्र 18 दिन के,

2019 3 सत्र मात्र 22 दिन केे और हद तो तब हो गई जब 2020 में मात्र 2 सत्र 6 दिन के हो पाये हैं।

बीजेपी का कांग्रेस पर हमला……

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत ने कहा कि कांग्रेस का आचरण सदन में सदैव अशोभनीय,अविवेकपूर्ण और अमर्यादित रहा है।

इसी कारण वह लोकतान्त्रिक संस्थाओ की गरिमा का ख्याल नही रख कर डमी विधान सभा का मंचन कर रही है।

भगत ने कहा कि डमी विधानसभा का आयोजन सदन का उपहास उड़ाना है।

ये आयोजन अतीत की अराजकता का स्मरण और गाल बजाने जैसा है।

भगत ने कहा कि कांग्रेस जन मुद्दों से भटक गयी है और भ्रामक प्रचार के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है।

कांग्रेस को पूर्व में घटित घटनाक्रम को याद रखना चाहिए। कांग्रेस को जब जनता ने सत्ता सौंपी तो वह घपले,घोटालो और राजनैतिक अस्थिरता की और बढ़ी।

पार्टी में अंतरकलह की वजह से राज्य के विकास पर इसका प्रतिकूल असर पड़ा।

सदन में भी कांग्रेस जन मुद्दों पर बहस के बजाए हंगामा मचाने को प्राथमिकता देती रही है।

यही कारण है कि दहाई के आसपास सिमटी कांग्रेस सदन में भी गुटबाजी की शिकार रही है और सड़क पर भी कई गुटो में बंटी हुई है।

बेहतर है कि विकाश के मुद्दों पर कांग्रेस सकारात्मक रूप से बहस करे विवाद नही।

कांग्रेस को जनता ने ठुकरा दिया है और इस तरह के हास्यास्पद कार्यक्रम के कारण जनता अब उसे गंभीरता से नही ले रही है।

भाजपा को जनता के सदन से पूर्ण समर्थन है और कांग्रेस बेनकाब हो चुकी है।

 

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