उत्तराखंड पुलिस प्रमोशन याचिका-हाइकोर्ट के सरकार को निर्देश

उत्तराखंड पुलिस प्रमोशन याचिका-हाइकोर्ट के सरकार को निर्देश

उत्तराखंड पुलिस प्रमोशन याचिका-हाइकोर्ट के सरकार को निर्देश

नैनीताल( अरुण शर्मा)। उत्तराखंड हाइकोर्ट ने उत्तराखण्ड पुलिस विभाग द्वारा हाल ही में जारी पुलिस सेवा नियामावली 2018 (संसोधन सेवा नियमावली 2019) को चुनोती देने वाली याचिका पर सुनवाई की गई।

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करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिए है अगर विभाग में इस नियमावली कोई प्रमोशन किया जाता है तो उसमें यह अंकित करना अनिवार्य होगा कि यह सभी प्रमोशन याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन रहेंगे।

सत्येंद्र कुमार व अन्य द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि इस सेवा नियमावली के अनुसार पुलिस कॉन्स्टेबल आर्म्स फोर्स को पदोन्नति के अधिक मौके दिए हैं ।
जबकि सिविल व इंटलीजेंस को पदोन्नति के लिये कई चरणों से गुजरना होगा ।
उत्तराखंड पुलिस प्रमोशन याचिका-हाइकोर्ट के सरकार को निर्देशयाचिकाकर्ताओ का कहना है कि उच्च अधिकारियों द्वारा उप निरीक्षक से निरीक्षक व अन्य उच्च पदो पर अधिकारियों की पदोन्नति निश्चित समय पर केवल डी पी सी द्वारा वरिष्ठता/ज्येष्ठता के आधार पर होती है।
परन्तु पुलिस विभाग की रीढ़ की हड्डी कहे जाने वाले, पुलिस के सिपाहियों को पदोन्नति हेतु उपरोक्त मापदण्ड न अपनाते हुये,
कई अलग-अलग प्रकियाओं से गुजरना पडता है। विभागीय परीक्षा देनी पड़ती है।
पास होने के बाद 5 कि०मी० की दौड़ करनी पड़ती है। इन प्रक्रियो को पास करने के उपरान्त कर्मियो के सेवा अभिलेखों के परीक्षण के बाद पदोन्नति होती है
इस प्रकार उच्च अधिकारियों द्वारा निचले स्तर के कर्मचारियों के साथ दोहरा मानक अपनाया जाता है ।
जिस कारण 25 से 30 वर्ष की संतोषजनक सेवा (सर्विस) करने के बाद भी सिपाहियो की पदोन्नति नही हो पाती है,
अधिकांशतः पुलिसकर्मी सिपाही के पद पर भर्ती होते है और सिपाही के पद से ही बिना पदोन्नति के सेवानिवित्त हो जाते है,
क्योकि निचले स्तर के कर्मचारियों की पदोन्नति हेतु कोई निश्चित समय अवधि निर्धारित नही की गई है
और न ही उच्च अधिकारियों द्वारा इस ओर कभी कोई ध्यान दिया गया है।
नियमावली में समानता के अवसर का भी उल्लंघन है ।

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