देहरादून(पंकज सिंह)। ढोल वादक धुमलाल के निधन ने उत्तराखंड के ढोल की थाप पर मायूसी छा गई है।

ढोल की थाप की हर विधा के महारथी धुमलाल की कमी मुखोटा नाटकों एवं नन्दा राजजात यात्राओं मुख्यश में हमेशा कमी खलती रहेगी।

जीवन के अंतिम दिनों में वे बदहाली के दौर से गुजरे,बीमार हुए तो सरकार पर निर्भर होना पड़ा।

राज्य सरकार की मदद के बाद भी गुरुवार को धुमलाल जिंदगी की जंग हार गए।

मंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने जनपद चमोली के ग्राम उर्गम निवासी ढोल वादक धूम लाल के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है।

उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति तथा शोक संतप्त परिजनों को धैर्य प्रदान करने की ईश्वर से कामना की है।

आपको बता दे कि कुछ समय पूर्व ही मुख्यमंत्री के निर्देश पर धूमलाल को एम्स ऋषिकेष एवं हिमालयन अस्पताल जौलीग्रान्ट में भी उपचार हेतु भर्ती करा गया था।

तथा उनके चिकित्सा पर होने वाला व्यय मुख्यमंत्री राहत कोष से किये जाने के भी निर्देश दिये थे।

मुख्यमंत्री ने मुखोटा नाटकों एवं नन्दा राजजात यात्राओं के ढोल वादक धूमलाल के निधन को लोक कला के लिये अपूरणीय छति भी बताया है।

चमोली जिले के सीमान्त जोशीमठ ब्लॉक के उर्गम गांव के निवासी धूमलाल जी पेशे से ढोल वादक थे।

ढोल की ऐसी कोई थाप नहीं जिसमें उन्हें महारत न हासिल हो।

पिछले कई दशकों से वह लगातार पहाड़ की इस सांस्कृतिक वाद्य परंपरा का संरक्षण और संवर्धन करते चले आ रहे हैं।

 

 

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