बाल कुपोषण मुक्ति अभियान
 

बाल कुपोषण से मुक्ति के किये कारगर साबित हो रहा गोद अभियान

देहरादून(अरुण शर्मा)। बाल कुपोषण का दर्द माँ के लिए किसी लाचारी से कम नही है।

उत्तराखंड में माँ की इसी लाचारी पर मरहम का काम कर रही है गोद अभियान ।

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हजारों की तादाद में यहां ऐसे बच्चे हैं जिनकी माताओं के सामने यह बेवशी है।

लेकिन प्रदेश में गोद अभियान चला कर त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार ने बेवश माताओं के आंसू पोंछने का सराहनीय काम किया है।

गौरतलब है कि कुपोषण पूरे देश की एक बड़ी समस्या है। उत्तराखंड में भी स्थिति बेहद कष्टप्रद है।

एक आंकड़े के मुताबिक प्रदेश में करीब 17000 कुपोषित बच्चे हैं,जिसमें 1600 बच्चे अतिकुपोषित पाए गए।

पूर्व की सरकारों में इस दिशा में अपेक्षित प्रयास नहीं हुए।

लेकिन सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बेवश माताओं के इस दर्द को समझा और इसका समाधान निकाला।

इसके लिए बाकायदा गोद अभियान चलाया गया।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत समेत सरकार के मंत्रियों के साथ ही सचिवालय के अधिकारियों ने भी अति कुपोषित बच्चों को गोद लिया।

कुपोषित बच्चों के जरूरी दवाएं और प्रति दिन का पोष्टिक आहार उपलब्ध कराया गया।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के निर्देशों पर चले गोद अभियान से कुपोषण के शिकार हुए अधिकांश बच्चे आज स्वस्थ्य हो गए हैं।

और कईयों के स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है, और सरकार का अभियान भी बदस्तूर जारी है।

कहना मुनासिब होगा कि टूटती सांसों को संभालने की महाभारत में सरकार के ईमानदार प्रयासों की जीत हुई और जिंदगियां फिर से खिलखिलाने लगी हैं।

हर कोई बेवश मां अब सीएम त्रिवेंद्र और उनके सहयोगियों को दुआएं दे रही है।

 

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