हरिद्वार (कमल खडका)। उत्तराखंड हिमालय की वादियों में आए चार धाम (Chardham) यात्रा में गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, बेलापुर, शिर्डी के साईं धाम से आए महंत श्री ऋषिकेश महाराज के सानिध्य में आए लगभग ढाई सौ से तीन सौ परिवार के महिला व पुरुषों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रभावित होकर मां गंगा के संरक्षण प्लास्टिक व पॉलीथिन के प्रयोग को अपने राज्य अपने गांव में इस्तेमाल ना करने को लेकर संकल्प लिया। पूर्व कृषि उत्पादन मंडी समिति अध्यक्ष के संयोजन में श्रवणनाथ स्थित बन्नू बिरादरी धर्मशाला के प्रांगण में पर्यावरण की रक्षा के लिए सामूहिक रूप से पॉलिथीन व प्लास्टिक की वस्तुओं को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केंद्र सरकार द्वारा प्रतिबन्धित किये जाने के फैसले का स्वागत करते हुए पर्यावरण को बचाने का संकल्पित होकर शपथ ली।

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इस अवसर पर महंत श्री ऋषिकेश महाराज ने कहा कि उत्तराखंड 2013 की प्राकर्तिक आपदा ने भारी जानमाल की हानि की थी लेकिन दुख का विषय है उत्तराखंड आने वाले सैलानी व क्षेत्रवासी उस प्राकर्तिक आपदा से सीख नही ले पाए है और लगातार प्लास्टिक के प्रयोग से हिमालय की वादियों में चल सोद सुख रहे है और नए पेड़ पौधे पनप नही पा रहे है जोकि संकेत है यदि मानव अपनी दिनचर्या को पर्यावरण की रक्षा के लिए नही बदलेगा तो आने वाली विपत्ति की रोकथाम नही हो पाएगी। वही इस अवसर पर पूर्व कृषि उत्पादन मंडी समिति अध्यक्ष संजय चोपड़ा ने कहा केंद्र की मोदी सरकार द्वारा प्लास्टीक की वस्तुओं को व उनके इस्तेमाल को प्रतिवन्दित किये जाने के फैसले का हम स्वागत करते है और इस आशावादी सोच व माहौल के साथ हमे पॉलिथीन की भांति जान जागरण अभियान चलाकर प्लास्टिक के प्रयोग को अलविदा करना होगा। देश के हिमालय क्षेत्र के राज्य आज पर्यावरण दूषित होने के कारण कई प्रकार की बीमारिया व महामारिया फेल रही है इसका कारण एक है कि हमारे दैनिक दिनचर्या में प्लास्टिक की वस्तुओं के प्रयोग की भारी मात्रा है पर्यावरण की रक्षा के लिए सामाजिक संगठन इच्छा शक्ति के साथ निरंतर प्रयास करे ताकि पर्यावरण को दूषित होने से बचाया जा सके।

महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक से आये चारधाम यात्रा पर तीर्थ श्रद्धालुओं द्वारा माँ गंगा के संरक्षण प्लास्टिक की वस्तुओं को प्रतिवन्दित व उनका प्रयोग ना करने का संकल्पित व शपथ लेते निखिल गोस्वामी, किशोर भीगोड़, सोमनाथ टाक, नंदकुमार गोरे, दिनेश लखोटिया, गुलाबबाई टाक, दशरत देवरे, विद्या गायकवाड़, ज्ञानेश्वर शिंदे, माधव जाधव, पुष्प बोहरा, सतीश टाक आदि प्रमुख रूप से शामिल रहे।

 

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