मोबाइल और मोमबत्ती की लाइट में डिलवरी कराने वाले उत्तराखंड में ‘एयर एंबुलेंस’ बदल पायेगी हालात

मोबाइल और मोमबत्ती की लाइट में डिलवरी कराने वाले उत्तराखंड में ‘एयर एंबुलेंस’ बदल पायेगी हालात

देहरादूनअरुण शर्मा)। उत्तराखंड में अस्पताल प्रबंधन और वहां की वयवस्थाओं को लेकर अक्सर चर्चाओं में रहने वाले प्रदेश को अपनी एयर एंबुलेंस मिलने जा रही हैं। अस्पताल प्रबंधन का आलम यह है कि राजधानी देहरादून में मोबाइल और मोमबत्ती की लाइट में डिलीवरी करायी जाती है वो भी एक नहीं नौ डिलीवरीयां। हालांकि दून महिला अस्पताल इसे तकनीकी खराबी का हवाला दे रहा है लेकिन सवाल यह है कि जिस प्रदेश में अस्पताल प्रबंधन का आलम यह हो वहां एयर एंबुलेंस से लोगों को कितना लाभ मिलेगा समझ से परे हैं।

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गणतंत्र दिवस पर उत्तराखंड को एक बड़ा तोहफा मिलने जा रहा है 26 जनवरी को सीएम त्रिवेंद्र रावत राज्य को अपनी पहली एयर एंबुलेंस सौंपने जा रहे हैं। लेकिन दूसरी तरफ सूबे के स्वास्थ्य व्यवस्थाओं और अस्पताल प्रबंधन को लेकर जो खबरें सामने आयी उसने मुख्यमंत्री की इस एयर एंबुलेंस की बात को न केवल फिका कर दिया ​अपितु उसे अप्रसांगिक बना दिया। दरअसल मुख्यमंत्री राज्य को पहली एयर एंबुलेंस सौंपने का ऐलान करते इससे पहले ही राजधानी देहरादून से ऐसी खबर आयी जिसने न केवल चौंकाने का काम किया अपितु प्रदेश के अस्पताल प्रबंधन पर भी सवाल खड़ा कर दिया।

मोबाइल की लाइट और मोमबत्ती की रोशनी में करायी गयी नौ डिलीवरीयां

राजधानी देहरादून के दून महिला अस्पताल में प्रबंधन की कहानी बयां करती इस खबर ने सबको चौंका दिया। जानकारी के अनुसार दून महिला अस्पताल में बुधवार देर रात मौसम खराब होने केे चलते लाइट चली गयी। उस समय डॉक्टर डिलीवरी करा रहे थे। फिर क्या था लाइट जाने के बाद जनरेटर तकनीकी खराबी के चलते नहीं चल पाया। ऐसे में डॉक्टरों को लेबर रूम में स्टाफ के मोबाइल की लाइट और मोमबत्ती की रोशनी में ही डिलीवरी कराने को मजबूर होना पड़ा। एक नहीं नौ महिलाओं की डिलीवरी इसी तरह करायी गयी। हालांकि सभी जच्चा बच्चा स्वस्थ्य हैं। लेकिन इस घटना ने राज्य की राजधानी देहरादून में अस्पताल प्रबंधन की पोल खोल कर रख दी हैं।

दून मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय के एमएस डॉक्टर केके टम्टा बताते है ​कि बारिश और खराब मौसम के चलते इस तरह की दिक्कत सामने आयी थी। उन्होने बताया कि उन्हे इसकी जानकारी मिल गयी थी। हालांकि वे बताते है कि उनका स्टाफ इस समस्या को दूर करने का प्रयास करता रहा। उन्होने इस तरह की समस्या भविष्य में न हो इसके लिए कारगर कदम उठाये जा रहे हैं।

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