हरिद्वार (आश्रुति) । 40 वर्षो के बाद एक बार फिर से प्रारम्भ हुई बागेश्वर जूना अखाड़ा से निकलने वाली छडी यात्रा। शुक्रवार को पंच दशनाम जूना अखाड़ा बागेश्वर से हरिद्वार के लिए छड़ी यात्रा आज सुबह हरिद्वार की मायादेवी मन्दिर (Mayadevi Mandir) प्रांगण पहुंची। जहां पंच दशनाम जूना अखाड़ा के संतों ने पूरे विधि विधान के साथ छड़ी की पूजा कर उसे मायादेवी मन्दिर (Mayadevi Mandir) में ही स्थापित कर दिया। यह छड़ी नवरात्रों में किसी शुभ दिन फिर से चारधाम की यात्रा करते हुए फिर से बागेश्वर पहुंचेगी।

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अमरनाथ के लिए निकाले जाने वाली छड़ी मुबारक यात्रा की तर्ज पर उत्तराखण्ड में भी जूना अखाड़ा 1100 वर्षो से छडी यात्रा निकालता आ रहा था जोकि किन्ही कारणों से लगभग 40 वर्ष पूर्व बन्द हो गयी थी जोकि अब एक बार​ फिर से संतो और सरकार के प्रयासों के माध्यम से प्रारम्भ हो गयी है। शुक्रवार 13 सितम्बर को बागेश्वर से छड़ी यात्रा का शुभारम्भ हुआ जो आज शनिवार को हरिद्वार के मायादेवी मन्दिर में पूरे विधि विधान के साथ स्थापित की गयी जिसमें जूना अखाडे के कई महामंत्री प्रेमगिरी महाराज के अलावा कई अन्य संत मौजूद रहें। इस अवसर पर महंत प्रेमगिरी ने पत्रकारों को बताया कि बागेश्वर से प्रारम्भ हुई यह छड़ी यात्रा जिसको मायादेवी में स्थापित किया गया है वह नवरात्रों में किसी शुभ दिन चारधाम यात्रा पर निकलेगी जिसमें सभी 13 अखाड़ों से जुड़े संत महात्मा शामिल होगें। उन्होंने बताया कि छड़ी यात्रा का वृतांत 1100 साल पुराना है, लेकिन कुछ कारणों से यहां 40 साल से छड़ी यात्रा बंद थी। जिसे फिर से शुरू किया जा रहा है। उन्होने कहा श्रीमहंत पुष्करराज गिरि के नेतृत्व में यह छड़ी यात्रा गंगोत्री,यमुनोत्री,केदारनाथ होते हुए बद्रीनाथ धाम पहुचेगी,जहां से वापिस बागेश्वर पहुचेगी जहां विशाल भण्डारे व पूर्जा अर्चना के साथ यात्रा का समापन होगा। इस यात्रा के दौरान पवित्र छड़ी मार्ग में आने वाले सभी पौराणिक मन्दिरों जो उपेक्षित पड़े है तथा जीर्ण-शीर्ण हो चुके है,उनके दर्शन करेगी ताकि उनका पुर्नोद्वार हो सके।

 

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