बद्रीनाथ धाम के कपाट खुले, घर बैठे करे अखंड ज्योति के अद्भुत दर्शन

बद्रीनाथ धाम के कपाट खुले, घर बैठे करे अखंड ज्योति के अद्भुत दर्शन

बद्रीनाथ धाम के कपाट खुले, घर बैठे करे अखंड ज्योति के अद्भुत दर्शन

 

बद्रीनाथ(कमल खड़का)। बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने के बाद चारधाम यात्रा का विधिवत शुरुवात हो चुकी है।

हालांकि उत्तराखंड सरकार ने कोरोना के चलते यात्रा को स्थगित की हुई है।

घर बैठे ही करे भगवान बद्रीविशाल के कपाट खुलने के बाद पहले दर्शन

मंगलवार को बद्रीनाथ धाम के कपाट पूरे विधि विधान के साथ खोल दिये गए।

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विश्वप्रसिद्ध श्री बदरीनाथ धाम के कपाट खुले अखंड ज्योति के दर्शन हुए।

कपाट खुलने के बाद बद्रीनाथ धाम में पहली पूजा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से की गई।

बद्रीनाथ धाम के कपाट खुले, घर बैठे करे अखंड ज्योति के अद्भुत दर्शनवेदऋचाओं के उदघोष के साथ ब्रह्ममुहुर्त में खुल गये कपाट।

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने श्री बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने के अवसर पर देश-विदेश के श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दी।

पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने श्री बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने पर प्रसन्नता जतायी कहा कोरोना से बचाव हेतु अस्थायी तौर पर चारधाम यात्रा पर रोक लगायी गयी।

कोरोना महामारी के कारण चारधाम यात्रा अस्थायी रूप से स्थगित, यात्रियों को आने की अभी अनुमति नहीं।

कपाट खुलने के दौरान कोरोना बचाव मानको का हुआ पालन

श्री बदरीनाथ धाम वैदिक मंत्रोचार एवं शास्त्रोक्त विधि-विधान से आज मेष लग्न पुष्य नक्षत्र में प्रात: 4 बजकर 15 मिनट पर खोल दिये गये है।

ग्रीष्म काल में निरंतर भगवान बदरीविशाल की पूजा- अर्चना होगी।

इस अवसर पर मंदिर तथा मंदिर मार्ग को श्री बदरी-केदार पुष्प सेवा समिति द्वारा लगभग 20 क्विंटल फूलों से सजाया गया था‌।

प्रात: तीन बजे से ही कपाट खुलने की प्रक्रिया शुरू हो गयी श्री कुबेर जी बामणी गांव से लक्ष्मी द्वार से मंदिर प्रांगण पहुंचे।

ठीक प्रात: 4 बजकर 15 मिनट पर श्री बदरीनाथ धाम के कपाट खुले इस अवसर पर कुछ ही लोग अखंड ज्योति के गवाह बने।

रावल जी द्वारा गर्भगृह में प्रवेशकर मां लक्ष्मी को उनके परिक्रमा स्थित मंदिर में विराजमान किया तत्पश्चात भगवान के सखा उद्धव जी एवं देवताओं के खजांची श्री कुबेर जी मंदिर गर्भगृह में विराजमान हो गये।

डिमरी पंचायत प्रतिधियों द्वारा भगवान बदरीविशाल के अभिषेक हेतु राजमहल नरेन्द्र नगर से लाये गये तेल कलश( गाडू घड़ा) को गर्भ गृह मे़ समर्पित किया

इसके साथ ही भगवान को माणा गांव के महिला मंडल द्वारा शीतकाल में कपाट बंद करते समय औढाया गया घृत: कंबल उतारा गया तथा प्रसाद स्वरूप बांटा गया।

भगवान के निर्वाण दर्शन के बाद अभिषेक किया गया। तत्पश्चात भगवान बदरीविशाल का श्रृंगार किया गया इस तरह निर्वाण दर्शन से श्रृंगार दर्शन की प्रक्रिया पूरी होती है। इस संपूर्ण पूजा प्रक्रिया में रावल, डिमरी भीतरी वडुवा, आचार्यों, हक हकूकधारियों, तीर्थ पुरोहितों की भूमिका रही।

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