एनजीटी ने मांगी होटल,आश्रम व धर्मशाला की सूची,एक करोड़ में तैयार होगी सूची

एनजीटी ने मांगी होटल,आश्रम व धर्मशाला की सूची,एक करोड़ में तैयार होगी सूची

देहरादून(ब्यूरो)। एनजीटी (National Green Tribunal) नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (Pollution Control Board ) से राज्य के उन होटलों, आश्रमों और धर्मशालाओं की सूची तलब की है, जिनमें 20 से अधिक कमरे हैं। इसके अलावा प्रबंधकों ने द्वारा की सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (S T P) व्यवस्था की भी जानकारी मांगी गयी हैं। इन सब के लिए एनजीटी ने चार अक्तूबर तक का समय दिया गया है।

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एनजीटी ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को एक माह पहले होटलों, आश्रमों और धर्मशालाओं की सूची उपलब्ध कराने के निर्देश दिये थे लेकिन एक माह पूरा होने के बाद भी विभागों की उदासीनता का यह आलम है कि इनकी सूची तैयार करने के लिए सरकारी विभागों की असर्मथता के बाद इसके लिए प्राइवेट सर्वे कंपनी की तलाश की जा रही हैं। लेकिन प्राइवेट कंपनीयों के बड़े बजट के चलते अभी तक किसी को इसकी जिम्मेदारी नहीं दी गयी हैं। ऐसे में चार अक्टुबर को होने वाली एनजीटी की सुनवाई में अधिकारी किस जवाब के साथ पेश होगें?

दरअसल एनजीटी के निर्देश के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने प्रशासन व विकास प्राधिकरणों से इसकी जानकारी मांगी जिसपर न केवल प्राधिकरणों ने अपितु प्रशासन ने भी अपनी अर्मथता जता दी। जिसके बाद बोर्ड ने​ निजी सर्वे कंपनी की मदद लेने की ठानी।​ जिसके लिए टेंडर भी जारी कर दिया गया। लेकिन बोर्ड की मुश्किले यहीं खत्म नहीं हुई सर्वे कपंनी के भारी भरकम बजट ने बोर्ड की मुश्किले बढ़ा दी हैं। जानकारी के अनुसार राज्य में इस सर्वे के लिए करीब एक करोड़ रुपये की जरुरत पड़ेगी।
बहरहाल इनसब के बीच बोर्ड के पास इस सुनवायी में समय सीमा बढ़वाने के सिवाय कोई चारा नजर नहीं आ रहा हैं। उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सचिव एसपी सुबुद्धि कहते है कि ब्योरे के लिए निजी कंपनी की मदद ली जा रही है। जिसके लिए प्रक्रिया शुरु कर दी गयी है।

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