हरिद्वार (विकास चौहान)। हरिद्वार में माँ गंगा (Ganga) की धारा को लेकर एक बार फिर से बहस छिड़ गई है। तत्कालीन हरीश रावत सरकार के आदेश को आज भी त्रिवेंद्र सरकार वापस नही कर सकी। और अब एक बार फिर भाजपा विधायक सुरेश राठौड़ के बयान के बाद इस पर विवाद खड़ा हो गया है। विधायक के बयान के बाद फिर से एक बार श्री गँगा (Ganga) सभा संस्था मुखर हो गई। प्रेस वार्ता कर गँगा (Ganga) सभा के पूर्व अध्यक्ष ने तो यहाँ तक कह डाला है कि इसमें यूपी और उत्तराखंड सरकार अपने फायदे के लिए गँगा को नदी मानने से इनकार कर रही है और हरिद्वार में गँगा किनारे जो यूपी सरकार का निर्माणाधीन होटल है वो योगी सरकार का मकबरा है।

हरिद्वार प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता के दौरान श्री गँगा सभा के पदाधिकारियों ने सुरेश राठौर के बयान की निंदा की। और उन पर कार्यवाही तक की चेतावनी दे डाली। श्री गँगा सभा के पूर्व अध्यक्ष अशोक त्रिपाठी ने तो यहाँ तक कह डाला कि ये सरकारें अपने हितों के लिए माँ गंगा को स्केप चैनल घोषित किये हुए है। उन्होंने कहा कि हरिद्वार में गंगा किनारे जो होटल यूपी सरकार बना रही है वो यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मकबरा है। कहा कि कोर्ट का आदेश है कि गंगा के 200 मीटर की दूरी पर कोई निर्माण नही हो सकता है। और यही कारण है कि यूपी सरकार अपने फायदे के लिए गँगा को स्केप चैनल घोषित किये हुए है। हरीश रावत सरकार ने इस आदेश को जारी किया था, और अब त्रिवेंद्र सरकार भी अपना ढाई साल का कार्यकाल पूरा कर चुकी है लेकिन ये हिंदुत्व का दम भरने वाली सरकार भी अपने वादे से मुकर गए है। वही श्री गँगा सभा के महामंत्री तन्मय वशिष्ठ ने कहा कि वो जल्द ही एक बार फिर से उत्तराखंड के मुख्यमंत्री से मिलेंगे और उनके पुनः आग्रह करेंगे कि वो जल्द ही गँगा को सकैप चैनल वाला आदेश निरस्त करें। जिस प्रकार गँगा निरंतर गँगा के रूप में बह रही है उसी प्रकार कागजो में भी गँगा गँगा के नाम से बहे।

 

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