गुरु की शरण मे ही मिलती है जीवन को नई दिशा, गुरु पूर्णिमा पर खास

गुरु की शरण मे ही मिलती है जीवन को नई दिशा, गुरु पूर्णिमा पर खास

हरिद्वार(कमल खड़का)। गुरु पूर्णिमा का पर्व पूरे देश मे बड़ी ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है।

हर कंही लोग अपने गुरु की पूजा के साथ वंदन करते नजर आए।

 

राजस्थान अलवर जिला के रामगढ़ तहसील ग्राम कारोली खालसा मैं आज गुरु पूर्णिमा का पर्व बड़ी श्रद्धा व धूमधाम से मनाया गया।

आषाढ़ मास शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को ही गुरु पूर्णिमा कहते हैं

आज का दिन गुरु पूजा का विधान है सभी अनुयायियों ने सुबह से ही मंदिर मैं पहुंच कर वस्त्र फल फूल व माला पहनाकर गुरु का आशीर्वाद प्राप्त किया।

बाबा गिरवर नाथ धाम मन्दिर में भी गुरु पूर्णिमा का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।

बाबा नंदलाल ने भक्तो का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि सत्य है कि भगवान् बनने की पात्रता हर पत्थर में नहीं होती लेकिन जो पत्थर भी भगवान् बनता है।

उसके लिए शिल्पकार जरूर चाहिए। जो कांट-छांट कर उसके दैवीय रूप को प्रगट कर सके। उसी शिल्पकार को गुरु कहा जाता है।

उन्होंने बताया कि जीव को भ्रम से व्रह्म की यात्रा करा दे, शिष्य को शव से शिव बना दे, मृत में मूर्ति प्रतिष्ठापित करा दे यही तो सदगुरु का काम है।

बाधा से राधा तक पहुँचाना, अपराध से आराधना की यात्रा, यही गुरु का कार्य है। गुरु कृपा से ही कौआ से हंस बना जा सकता है।

दुनिया में कौन ऐसा है जिसने गुरु तत्व की शरण ना ली हो। भगवान् राम, भगवान् कृष्ण, सब गुरु की शरण में गए हैं।

गुरु चरणों की सेवा को भगवान् राम ने तो तीसरी भक्ति भी बताया है।

आज के दिन दुनिया के समस्त गुरुओं को प्रणाम करते हुए अपने सदगुरु को चरणों में प्रणाम करो।

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