Ganga बंदी से चरमराई धर्मनगरी हरिद्वार की अर्थव्यवस्था

Ganga बंदी से चरमराई धर्मनगरी हरिद्वार की अर्थव्यवस्था

हरिद्वार (विकास चौहान)। हरिद्वार में यूपी सिंचाई विभाग द्वारा की गई वार्षिक गँगा (Ganga) बंदी से हरिद्वार की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है। हर की पौड़ी समेत तमाम घाटों पर गँगा(Ganga) में पानी न होने के चलते यहाँ तीर्थयात्रियों की संख्या में भारी गिरावट देखने को मिलती है जिसका सीधा असर यहां के ट्रेवल, होटल समेत तमाम करोबार पर पड़ा है। ऐसी स्थिति में श्री गँगा(Ganga) सभा के पदाधिकारियों और व्यापारियों ने राज्य सरकार से माँग की है कि त्यौहारी सीजन के बाद ही गँगा बंदी की जाए।
दरअसल यूपी सिंचाई विभाग द्वारा गँगा की साफ सफाई के लिए हर साल दशहरे से लेकर दीपावली तक गंगनहर का पानी रोक दिया जाता है। इस बार भी दशहरे के दिन गंगा बंदी कर दी गई है , हर पौड़ी समेत तमाम घाटों पर गंगाजल न होने से तीर्थयात्री हरिद्वार का रुख नही कर रहे है। गंगा पर निर्भर हरिद्वार के होटल, ट्रेवल समेत तमाम व्यवसायी परेशान है। होटल कारोबारी विभाष मिश्रा और ट्रेवल कारोबारी उमेश पालीवाल उनका कहना है कि गँगा तीर्थयात्रियों के न आने से उनके व्यापार ठप पड़े है, ट्रेवल और होटल कारोबार की बुकिंग नही हो रही है, और जिन लोगो ने पहले बुकिंग कराइ हुई थी वो भी कैंसिल हो गई है। परेशान व्यापारियों ने राज्य सरकार से माँग की है कि त्यौहारी सीजन के बाद ही गँगा बंदी की जाए।
वही हरिद्वार में हर की पौड़ी की देखरेख के लिए पंडित मदन मोहन मालवीय द्वारा स्थापित संस्था श्री गँगा सभा भी त्योहारी सीजन में वार्षिक गंगा बंदी के खिलाफ है। श्री गँगा सभा के महामंत्री तन्मय वशिष्ठ का कहना है कि यूपी सिंचाई विभाग द्वारा दशहरे से लेकर दिवाली तक गँगा बंदी का निर्णय गलत है, दशहरे से लेकर दिवाली तक कई त्यौहार बीच में पड़ते है और गँगा में जल न होने से तीर्थयात्री यहाँ का रुख नहीं करते है। हरिद्वार की अर्थव्यवस्था तीर्थाटन पर आधारित है और ऐसी स्थिति में यहाँ की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है। ये सरकार हर साल देती है दीवाली से पहले दीवाली का गिफ्ट। उन्होंने भी सरकार से मांग की है कि दिवाली के बाद ही गंगाबंदी कर गँगा साफ़ सफाई की जाए।
त्यौहारी सीजन में गँगा में जल न होने से तीर्थयात्री हरिद्वार का रुख नहीं कर रहे है , ऐसे में तीर्थाटन पर निर्भर हरिद्वार की अर्थव्यवस्था चरमरा सी गई है। अब देखना होने कि व्यापारियों की इस समस्या पर सरकार कब ध्यान देगी।

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