देहरादून(अरुण शर्मा)। हरिद्वार कुम्भ मेले को लेकर अखाड़ा परिषद के संतों ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के साथ बैठक की।

बैठक में 15 दिसम्बर तक सभी काम पूरे कर लिए जाने के निर्देश सी एम ने जारी किए।

फरवरी में अंतिम रूप से मेला के स्वरूप पर निर्णय लिया जाएगा।

सचिवालय में मुख्यमंत्री मंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कुम्भ मेला में संतो, महात्मा और अखाड़ो को मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराने हेतु बैठक की।

बैठक में कहा गया कि कुम्भ मेला का आयोजन समय पर होगा।

मेला से सम्बन्धित स्थाई कार्यो को 15 दिसम्बर के पूर्व करने का निर्देश दिया गया ।

कोरोना को लेकर सभी आवश्यक उपाय किया जाएगा।

कुम्भ मेला में अखाड़ा परिषद के प्रतिनिधि का सहयोग लेने के लिये बुलाई गई बैठक में कुम्भ मेला की तैयारी को लेकर बैठक थी।

बैठक में कहा गया कि छड़ी यात्रा पर्व की तरह सन्देश देने का आयोजन धर्मस्व विभाग सितंबर में करेगा।

कहा गया कि 2010 में कुम्भ मेला में प्रयोग किया गया एरिया ही इस बार मेला में होगा।

सन्तो ने जल समाधि की जगह भू समाधि लेंगे सन्त सहमति प्रदान किया। अखाड़े के इष्ट देव के नाम 13 अखाड़ो के नाम पर घाट नील धारा में बनाने पर सहमति बनी ।

मनसा देवी हिल बाई पास मार्ग , मेला अवधि में खुला रहेगा।

कुंभ मेला में साफ सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। सौंदर्य का आधार स्वच्छता रहेगा।

बैठक में कहा गया कि कुम्भ मेला की शोभा संत,महात्मा होते है। सन्तो के सहयोग से भव्य दिव्य कुम्भ होगा।

रामजन्म भूमि में सन्तो महात्मा के सहयोग के आभार भी प्रगट किया गया।

कोरोना का प्रभाव मेला की तैयारी पर पड़ा है। लेकिन मेला परम्परागत रूप में समय पर ही होगा।

फरवरी में अंतिम रूप से मेला के स्वरूप पर निर्णय लिया जाएगा।

 

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