बसंत पंचमी पर शिक्षण संस्थानों में रही धूम,बाबा रामदेव ने बताई पते की बात

बसंत पंचमी पर शिक्षण संस्थानों में रही धूम,बाबा रामदेव ने बताई पते की बात

हरिद्वार(कमल खड़का)। हरिद्वार-देहरादून सहित ओर देश मे बसन पंचमी की धूम रही।

एक ओर जंहा देहरादून के देवभूमि ग्रुप्स ऑफ इंस्टीटूट में सरस्वती पूजन के साथ रंगोली और पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन कर मनाया गया।

वही दूसरी ओर योग और आध्यत्म के एक सशक्त हस्ताक्षर माने जाने वाली पतजंलि योग ओंठ में भी बसंत पंचमी की धूम रही।

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देहरादून-देव भूमि ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट में भी बसंत पंचमी का पर्व बड़ी धमधाम के साथ मनाया गया।

इस अवसर पर कॉलिज परिसर में एग्रीकल्चर विभाग और देवभूमि मेडिकल कॉलिज ऑॅफ आयुर्वेद एंड हॉस्पिटल के सयुक्त तत्वाधान में वृक्षारोपण भी किया।

बसंत पंचमी पर्व की शुरुआत मां सरस्वती के विधि विधान के साथ पूजन किया गया।

इसके उपरांत कॉलिज परिसर में वृक्षारोपण किया गया। जिसमें शिक्षकों के साथ-साथ छात्र-छात्राओं ने बड़ी संख्या में प्रतिभाग किया।

बसंत पंचमी
बसंत पंचमी पर पंतजलि में कार्यक्रम

इस अवसर पर विभाग ने रंगोली और पोस्टर का आयोजन किया गया।

इस प्रतियोगिता में छात्र-छात्राओं ने अपने हुनर से बसंत पंचमी के पर्व को अलग अलग रंगों में कागज पर उकेरा।

देवभूमि ग्रुप्स ऑफ इंस्टीटूट के एम डी अमन बंसल ने कहा कि आज का दिन माँ सरस्वती की पूजा के तौर पर मनाया जाता है।

आज के दिन माँ सरस्वती के पूजन के साथ पर्यावरण संरक्षण पर जागरूकता एक अदभुत प्रयास है जिसकी सराहना जितनी की जाय कम है।

पतंजलि योगपीठ में वसंत ऋतु का स्वागत बहुत ही हर्ष और उल्लास के साथ में किया गया।

पतंजलि में मकर सक्रांति से प्रारंम्भ हुआ महापरायण यज्ञ की भी पूर्ण आहुति आज के पावन दिन पर दी गई।

स्वामी रामदेव और पूज्य आचार्य बालकृष्ण ने यज्ञ में सम्मिलित सभी यजमानों पर पुष्प वर्षा करते हुए वसंत ऋतु का शुभ आषीश प्रदान किया।

स्वामी रामदेव ने कहा कि आज का दिन विद्यार्थियों का दिन है क्योंकि आज के दिन माता सरस्वती की वंदना की जाती है इसलिए वसंत पंचमी के दिन विद्यार्थियों को माँ सरस्वती की पूजा-अर्चना करनी चाहिए।

स्वामी रामदेव ने अखाड़ों की परम्पराओं के सम्मान में बोलते हुए कहा कि उदासीन पंचायती अखाड़ा बहुत बड़ा अखाड़ा है।

जहाँ पर सभी तपस्वी संतों का वास है पंचायती अखाडे को पंचायती इसलिए बोला जाता है।

क्योंकि यहाँ पर लोकतांत्रिक परम्पराओं का निर्वहन किया जाता है यहाँ के तपस्वी संत हमेशा वेदों से जुड़ी हमारी संस्कृति व उनके ज्ञान की परम्पराओं को समाज में रोपित करने का काम करते हैं।

आचार्य बालकृष्ण ने कहा है कि आज का दिन आयुर्वेद के गौरव का दिन है जब वनस्पतियां अपना रंग-रूप बदलती हैं।

जिसके कारण सम्पूर्ण वातावरण में उष्णता के कारण प्रसन्नता की अनुभूति होती है।

जिसका व्याख्यान बेल, लताओं द्वारा स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।

आचार्य ने आज के युवा विद्यार्थी जो तंत्र-मंत्र के जनजालों में फंसें हुए हैं उन पर कटाक्ष करते हुए कहा है कि उन्हें ऐसी विद्याओं से बचना चाहिए

और अपने ज्ञान को सही दिशा में उपयोग करते हुए राष्ट्र में अपना सहयोग करना चाहिए।

 

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