हरिद्वार (विकास चौहान)। गँगा की निर्मलता और अविरलता के लिए काम करने वाली संस्था ने जंगली हाथियों (Elephant) के हमले में हुई ग्रामीणों की मौत के लिए जिला प्रशासन और खनन माफियाओं को जिम्मेदार ठहराया है। मातृ सदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद ने दोनों मृतकों को एक एक करोड़ रुपये मुआवजा दिए जाने की माँग भी की और इस मुआवजे की वसूली जिला प्रशासन, वन विभाग और खनन माफियाओं से कराए जाने की बात कही है। साथ ही उन्होंने हाथियों (Elephant)  को न मारने की अपील की और चेतावनी दी है कि यदि वन विभाग और ग्रामीण(Elephant) हाथियों को मारने का प्रयास करेंगे तो मातृ सदन उसके खिलाफ कोर्ट जाएगा।

गौरतलब है कि दो दिन पूर्व हरिद्वार वन विभाग से सटे गाँवों में जंगली हाथियों के झुंड ने दो ग्रामीणों को मौत के घाट उतार डाला। हरिद्वार की धार्मिक संस्था मातृ सदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद ने इन मौतों के लिए जिला प्रशासन और खनन माफियाओं को जिम्मेदार ठहराया है। प्रेस वार्ता कर स्वामी शिवानंद ने कहा कि जंगली हाथियों के टापूओं को जिला प्रशासन की मिलीभगत से खनन माफियाओं ने खत्म कर दिया है, इन टापुओं पर हाथियों का चारा हुआ करता था। अब इन टापूओं पर चारा न मिलने से हाथी आबादी का रुख कर रहे है। हालांकि स्वामी शिवानंद ने मृतकों के लिए एक करोड़ रुपये मुआवजे की माँग की है और इस एक करोड़ रुपये की वसूली जिला प्रशासन, वन विभाग और खनन माफियाओ से की जाने की बात कही।
वही स्वामी शिवानंद ने जंगली हाथियों को न मारने की अपील भी की। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि वन विभाग या कोई भी ग्रामीण हाथियों की हत्या करने का प्रयास भी करेगा तो मातृ सदन उसके खिलाफ कोर्ट जाएगा और सुप्रीम कोर्ट तक जाएगा।

 

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