विदेश में चुना लगाता था देहरादून का यह बिल्डर,साइबर क्राइम मामला

विदेश में चुना लगाता था देहरादून का यह बिल्डर,साइबर क्राइम मामला

विदेश में लोगों को चुना लगाता था देहरादून का यह बिल्डर,मामला साइबर क्राइम का है

 

देहरादून(अरुण शर्मा)। उत्तराखंड STF एवं साईबर क्राईम पुलिस स्टेशन की संयुक्त कार्यवाही में मिलई बड़ी सफलता।

विदेश में लोगों को वायरस हटाने के नाम पर देहरादून से चुना लगाने वाले गिरोह के मास्टरमाइंड पुलिस की गिरफ्त में है।

ये लोग विदेशो में रह रहे लोगो को विभिन्न सेवा देने और कंप्यूटर में फ़र्ज़ी वायरस से सिस्टम को नुकसान से बचाने के नाम पर अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराधों को अंजाम देते थे।

इनसे पूछताछ ओर जांच में विदेश से डॉलर में पेमेंट,अवैध धन से प्रॉपर्टी में इन्वेस्टमेंट, और करोड़ो रूपये के बैंक ट्रांसक्शन्स का चला पता है।

मजे की बात यह है कि पकड़ा गया आरोपी देहरादून में A. D.Builders के नाम से प्रोपेर्टी का आफिस चला रहा आ।

अभियुक्त द्वारा किया खुलासा किया कि देहरादून व अन्य स्थानों पर कॉल सेंटर्स को बंद करके स्वंम द्वारा वर्चुअल नंबर्स से साइबर अपराध को अंजाम दिया जा रहा था।

निपुण भोपाल का रहने वाला है तथा टेक्सास (Texas) के एक कॉलेज में पढ़ता था।

पूरे रैकेट के भारत से संचालन और बैंक एकाउंट डिटेल्स,प्रोपेर्टी इन्वेस्टमेंट तथा महत्वपूर्ण सूचनाओ को इंटरनेशनल एजेंसीज व एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट से साझा किया जयेगा।

अभियुक्त का साथी दिलीप कुमार थुपेला निवासी चंद्रबनी पहले से ही घटनास्थल पर नहीं था वह कहीं जा रखा था,वह मौके से फरार है।

विदेश में लोगों को चुना लगाता था देहरादून का यह बिल्डरअभियुक्त के 4 बैंक खाते जिसमें एक खाते में 9.5 लाख दूसरे में 4.5 लाख

तीसरे में 2.5 लाख रुपए हैं तथा एक अन्य खाते में लगभग विगत वर्ष में 3.50 करोड़ का ट्रांजैक्शन हुआ है।

साथ में उसके द्वारा 52लाख का जमीन लेन-देन में निवेश देहरादून में तथा उसके द्वारा एक 20 लाख का फ्लैट लिया गया है ऐसा पता चला है।

गोपनीय जांच के आधार पर अभियुक्त एवं उनके साथियों के अनुमानित 10 से 12 बैंक खाते हैं।

दिल्ली में एक व्यक्ति को 15 लाख चेक से एवं 5 लाख कैश दिए।

अभियुक्त द्वारा दिलीप की माता एवं बहन को करीब 18 लाख खाते में भेजे हैं।

विवेचना से स्पष्ट हो पाएगा कि कितने कुल रुपए का मामला एवं ट्रांजैक्शन हुआ है।

अभियुक्त से अन्य पूछताछ पर पता चला की मासिक लाखों का खर्चा अभियुक्त द्वारा किया जाता था।

*अपराध का तरीका*

अभियुक्त द्वारा एक वर्चुअल नम्बर से अपने नम्बर पर लिया है।

जिसको Microsoft Support System*के प्रतिनिधि के रूप में काम करने के लिये लिया था।

अभियुक्त का एक साथी निपुन गन्धोक जो कि अमेरिका में रह रहा था उसके साथ मिलकर 02 वर्ष पूर्व विदेशी व्यक्तियों को माईक्रोसाफट कम्पनी से सम्बन्धित होना

बताकर वर्चुअल नम्बर के माध्यम से सम्पर्क कर उनके कम्पयूटर से वायरस हटाने की बात कह कर धोखाधडी करता था।

इस काम के लिये जो पैसा निपुन के पास आता था उसमें अभियुक्त का हिस्सा विदेश से भेजता था।

उसी समय के आसपास अमेरिका की पुलिस ने निपुन को गिरफतार कर लिया था और उसके बाद अभियुक्त ने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर ये काम करना शुरू कर दिया था।

ये लडके अभियुक्त को अमेरिकन विदेशी कस्टर के नम्बर भेजते थे जिनको अभियुक्त अपने लैपटाप में साफटवेयर के माध्यम से डील करता था

और उनसे विभिन्न कम्पनियों जैसे एच0पी0, डैल, कैनन, लैक्समार्क के टेकशीयन के नाम से सर्विस प्रोवाईडर के रूप में पैसे प्राप्त करता था।

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