मछली खाने वालों के लिए वन विभाग की चेतावनी, जरा संभलकर

मछली खाने वालों के लिए वन विभाग की चेतावनी, जरा संभलकर

मछली खाने वालों के लिए यह खबर खास है। चमोली में आई आपदा के बाद वन विभाग ने नदियों से मछली न खाने की सलाह दी है।

दरअसल चमोली आपदा के चलते नदियों में बड़ी मात्रा में मछलियां मरने की बात सामने आ रही थी।

चमोली(कमल खड़का)। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग, श्रीनगर में इस समय नदियों से बड़ी संख्या में मछली मर कर बाहर आ रही है।

मछली खाना हो सकता है खतरनाक
मछली खाना हो सकता है खतरनाक

जिन्हें उठाने के लिए बड़ी संख्या में लोग नदी किनारे जमा हो रहे है।

जिसकी सूचना मिलने। पर वन विभाग सक्रिय हो गया है और मछलियों के सैमपल जांच के लिए भेज दिया है।

वन विभाग ने इस वक्त नदी से मछलियों को न खाने की सलाह दी है।

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बड़ी संख्या में मछलियों के मरने के मामले को गंभीरता से लिया गया है।

 

ग्लेशियर और डैम के टूटने के बाद नदी के पानी में कैमिकल, गाद और सीमेंट मिट्टी के पूरी तरह मिक्चर होने से बड़ी संख्या में मछलियों की जान गई है।

अकेले रुद्रप्रयाग में एक टन से अधिक मछलियों के मरने की जानकारी मिली है।

जबकि चमोली जिले के साथ ही श्रीनगर तक मछलियों के मरने का सिलसिला जारी रहा।


बीती रात से अलकनंदा नदी का जल स्तर बढ़ने लगा, किंतु यह मलबे, सीमेंट और कैमिकलयुक्त पानी से नदी का रंग भी बदल गया।
रात गुरजने के बाद जैसे ही सुबह हुई तो अलकनंदा नदी में बड़ी मात्रा में नदी किनारे मछलियों के ढेर लगने शुरू हो गए।
देखते ही लोग अनेक स्थानों पर मछलियां इकट्टा करते हुए उठाने लगे।
इधर वन विभाग ने बड़ी संख्या में मछलियों के मरने के बाद वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट से बातचीत शुरू कर दी है।
नदी से सैम्पल मंगाए गए हैं, फोटो भी वाइल्ड लाइफ को भेज दिए है।
वन विभाग ने भी आंशका जताई है कि बड़ी संख्या में मछलियों के मरने के पीछे डैम साइड में कैमिकल, सीमेंट, मलबा और अन्य कारण हो सकते हैं।
जिससे मछलियों के आवास को खतरा पहुंचा और वह शौक में आ गई।
इस पूरे मामले में वन विभाग इसका अध्ययन कर रहा है।
नदी से उठाई गई बड़ी संख्या में मछलियों का मामला अफसरों के पास पहुंचने के बाद पुलिस और वन विभाग ने इस वक्त नदी से मछलियों को न खाने की सलाह दी है।

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