वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन योजना
 

हरिद्वार(अरुण शर्मा)।  वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना में घोटाले में बुधवार को अहम मोड़ उस समय देखने को मिला जब हरिद्वार जिला कोर्ट ने वर्ष 2003-04 से 2011 तक के हरिद्वार में रहे अधिकारियों के खिलाफ दिए मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिये। आपको बता दें कि लाखों रुपये के इस घोटाले में कई लोगों ने फर्जी शपथ पत्र देकर लोन लिया था। कोर्ट ने तत्कालिन हरिद्वार के जिला अधिकरी ,मुख्य विकास और जिला पर्यटन विकास अधिकरी समेत कई अधिकारियों के खिलाफ हुआ मुकदमा दर्ज करने के आदेश जारी किये है। कोर्ट ने यह आदेश अधिवक्ता अरुण भदौरिया द्वारा दाखिल वाद पर सुनवाई करते हुए आदेश जारी किये हैं।

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2003 में उत्तराखंड सरकार की शुरु की गयी वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना में बेरोजगार लोगों के लिए थी। जिसमें वे पर्यटन से जुड़ी योजना मे लोन लेकर अपना काम शुरु कर सकते थे। लेकिन यह उत्तराखंड में व्यापत भ्रस्टाचार का ही आलम है कि अधिकारीयों से सांठगांठ कर फर्जी शपथ पत्रों के आधार पर रसूखदार लोगों ने बेरोजगार बनकर लाखों रुपये के लोन पास करावा लिए। दायर वाद के अनुसार 2004 से 2011 तक 250 से भी अधिक लोगों को लोन दिया गया। ऋण पास करने वाली समिति द्वारा नियमों की अनदेखी कर लोन पास किया गया।

लंबी लड़ाई के बाद हुआ मुकदमा

ऐसा नहीं है कि इस मामले में पहले भी मुकदमा दर्ज कराने का प्रयास किया गया लेकिन यह रसूखदारों का ही जलवा था कि प्रशासनिक स्तर पर कोई कार्यवाही नहीं हो पायी। फर्जी शपथपत्र देकर लोन लेने वालों में भाजपा के विधायक की पत्नी का नाम भी शामिल है। वाद दायर करने वाले ​अधिवक्ता बताते है कि इस मामले में कई बार शासन स्तर से शिकायत की जा चुकी थी लेकिन किसी तरह की कोई कार्यवाही नहीं हुई। जिसके बाद 23 दिसंबर 2011 में 156—3 में वाद दायर किया गया। सालों की सुनवाई के बाद हरिद्वार जिला कोर्ट के प्रथम एसीजे/एसडी ने दिए मुकदमा दर्ज करने के आदेश जारी किये है। जिसमें तत्कालिन हरिद्वार के जिला अधिकरी ,मुख्य विकास और जिला पर्यटन विकास अधिकरी समेत कई अधिकारी शामिल हैं।

 

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