उत्तराखंड में भगवान हड़ताल की हडताल पर सदन से सड़क तक त्राहिमाम
 

हरिद्वार(अरुण शर्मा)। उत्तराखण्ड में मरीज को दर्द से छुटकारा दिलाने वाले भगवान पिछले चार पांच दिन से हड़ताल पर हैं ।इस हड़ताल से उत्तराखण्ड त्राहि त्राहि कर रहा है सरकार इसको लेकर लापरवाह दिखाई दे रही है । इस मामले में जंहा सदन में विपक्ष के सवालों पर सरकार के पास कोई ठोस जवाब नहीं दिखायी दिया तो वहीं इस मामले में सरकारी अस्पतालों की हालत भी सबके सामने आ गयी। ऐसी संवेदनहीनता सरकार कैसे कर सकती है ।मुख्यमंत्री को इस विषय पर अविलंब निर्णय लेते हुए हड़ताल समाप्त करवानी चाहिए ।वार्ता के लिए एक कमेटी बना कर उचित व्यवस्था देनी चाहिए ।

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आइएमए की इस बात में काफी हद तक सच्चाई दिखाई देती है कि CEA की शर्तें व्यवहारिक नही है इसमें कई विन्दुओं पर विचार करने की आवश्यकता है ।आइएमए उत्तराखण्ड सरकार से पिछले कई माहो से इन अव्यहारिकता से अवगत करा कर इसका सांकेतिक विरोध जता रही थी ।फिर भी सरकार नही चेती ऐसा क्यों?जबकि मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र रावत जी एक ईमानदार और कर्मठ राजनेता हैं ।कहीं ऐसा तो नही मुख्यमंत्री ने इस विषय को नौकरशाहों पर छोड़ दिया है ।यदि ऐसा है तो उत्तराखण्ड के रोगियों को दर्द से छुटकारा मिलता नही दीख रहा है ।
सुनने में आया है दिल्ली सरकार इसे नही लागू कर रही है ।हरियाणा सरकार भी इसमें संशोधन करने जा रही है ।अन्य कई राज्य भी अभी इस पर अध्ययन कर रहे हैं ।तो इस पर्वतीय राज्य को इतनी जल्दी क्यों है ?जहाँ वैसे ही चिकित्सा व्यवस्था पहाड़ पर चढने को हाँफ रही हो उस पर और बोझ लादना मेरी समझ से परे है ।मैं पूरे कुमायूं की चिकित्सा व्यवस्था से साक्षात परचित हूँ ,अत्यंत दयनीय स्थिति है। आप देखेंगे तो मन द्रवित हो उठेगा । मुझे इसमें सरकार की हठधर्मिता नजर आ रही है जिससे जनता मानव निर्मित कष्ट भोगने को बाध्य है ।

 

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