बजट सत्र का दूसरा-विपक्ष के हमलावर तेवरों के बीच तो क्या इस्तीफा दे देते प्रकाश पंत ?

बजट सत्र का दूसरा-विपक्ष के हमलावर तेवरों के बीच तो क्या इस्तीफा दे देते प्रकाश पंत ?

देहरादून(पकंज सिंह)। बजट सत्र के दूसरे दिन विपक्ष के हमलावर तेवर के बीच मुख्यमंत्री और आबकारी मंत्री के इस्तीफे की मांग के दौरान आबकारी मंत्री के बयान ने सबको चौकाने का काम किया। विपक्ष ने विधान सभा की कार्यवाही शुरू होते ही नियम 310 के तहत जहरीली शराब का सवाल सदन में उठाया जिसके बाद नियम 310 के तहत विपक्ष चर्चा पर अड़ा रहा वहीं हंगामे के बाद विपक्ष ने सदन से वॉक आउट..किया। यही नहीं इस चर्चा के दौरान सरकार का पक्ष रखते हुए संसदीय कार्यमंत्री और आबकारी मंत्री प्रकाश पंत ने घटना के बाद विचलित होने की बात कहते हुए कहा कि उन्होने मुख्यमंत्री के सामने यह प्रस्ताव रखा था। जिसकी मांग विपक्ष सदन में कर रहा था। दरअसल विपक्ष इस घटना पर मुख्यमंत्री और आबकारी मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़ा हुआ था। ….उधर राज्य सरकार भी सदन के अंदर शराब को लेकर गिरती हुई नजर आई…. देखिए ये रिपोर्ट….।

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इस्तीफा देते प्रकाश पंत !

विपक्ष की इस्तीफे की मांग और मुवावजा बढ़ाकर दस लाख किये जाने की मांग पर जब संसदीय कार्यमंत्री और आबकारी मंत्री प्रकाश पंत सरकार का पक्ष रखने के लिए उठे तो उन्होने अपने को हरिद्वार जिले में जहरीली शराब की घटना से विचलित बताते हुए ऐसी बात कह दी जिसने सबको चौंका दिया। प्रकाश पंत ने कहा कि वे इस घटना से दिल से विचलित थे और उन्होने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत से इस बात का ज्रिक किया था जिसकी मांग विपक्ष सदन में कर रहा हैं। पंत का इशारा अपने इस्तीफे की ओर था। हालांकि विपक्ष ने प्रकाश पंत की इस बात को केवल बोलने वालेी बात करार दिया। प्रकाश पंत के इस बयान पर जब पीसीसी अध्यक्ष प्रीतम सिंह से पूछा गया तो उन्होने इसे केवल धडियाली आंसू करार देते हुए इसे केवल बोलने वाली बात बतया । प्रीतम सिंह ने कहा कि जब ऐसी बात थी तो उन्हे किसने रोका। बहरहाल विपक्ष के हमलावर तेवरों के बाद प्रकाश पंत का सदन में दिया गया बयान अपने आप में बड़ी बात हैं।

विपक्ष का वॉकआउट

विधानसभा बजट सत्र के दूसरे दिन भी विपक्ष ने जहरीली शराब मामले को लेकर सदन में दबाव बनाया। जिसके बाद स्पीकर ने प्रश्नकाल स्थगित करते हुए चर्चा की अनुमति दी। जिस पर विपक्ष ने नियम 310 में चर्चा की मांग की। विपक्ष की यह मांग ग्रहण करने योग्य है या नहीं सदन में इस पर चर्चा करायी जा रही है। सोमवार को बजट सत्र के पहले दिन राज्यपाल बेबी रानी मौर्य के अभिभाषण के दौरान कांग्रेस विधायकों ने हरिद्वार जिले में जहरीली शराब के सेवन से हुई मौतों के मामले में नारेबाजी शुरू कर दी। सरकार पर शराब माफिया को संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस विधायक मुख्यमंत्री के इस्तीफे व सरकार की बर्खास्तगी की मांग को लेकर वेल में आ गए। विपक्ष के विधायक विधानसभा में धरने पर बैठ गये और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। हालांकि विपक्ष के वॉकआउट के बाद भी विधानसभा की कार्यवाही जारी रही। यही नहीं लंच के बाद विपक्ष ने कार्यवाही में हिस्सा नहीं लिया।

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