पौड़ी लोकसभा सीट-चेले और बेटे के बीच किसके होगें “खडूड़ी”,बीजेपी के लिए खतरा

पौड़ी लोकसभा सीट-चेले और बेटे के बीच किसके होगें “खडूड़ी”,बीजेपी के लिए खतरा

हरिद्वार(अरुण शर्मा) । लोकसभा चुनाव 2019 के महासंग्राम में उत्तराखंड की पौड़ी लोकसभा सीट के रोमांच ने इसे सबसे हॉट सीट बना दिया हैं। हालांकि अभी बीजेपी कांग्रेस ने अपने प्रत्याशीयों के नाम की औपचारिक घोषणा नहीं की हैं लेकिन जो नाम अभी तक सामने आ रहे उससे इस सीट का रोमांच अभी से दिखाई देने लगा हैं।

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उत्तराखंड की सबसे हॉट बन रही इस सीट से कांग्रेस जंहा जनरल बीसी खंडूडी के बेटे मनीष खंडूड़ी को मैदान में उतार सकती है तो वहीं बीजेपी इस सीट पर जनरल के राजनितिक शिष्य माने जाने वाले तीर्थ सिंह रावत पर दांव खेलने की तैयारी में हैं।

ऐसे में किसके होगें बीसी खंडूडी यह सवाल इस सीट की रोचकता को बढ़ाने का काम कर रहा हैं। राजनिति के जानकार मानते है कि ऐसी स्थिति में खडूड़ी अपने बेटे के साथ ही होगें क्योंकि मनीष ने पिता ​की अनुमति के बाद ही कांग्रेस का हाथ थामा हैं।

राजनिति के मौजूदा माहोल को देखते हुए पौड़ी लोकसभा सीट पर मनीष खंडूडी और जनरल के रा​जनितिक चेले तीर्थ सिंह रावत के बीच मुकाबला बनता दिख रहा हैं। ऐसे में किसके होगें खडूड़ी चर्चा तेजी से रा​जनितिक गलियारों में गूंज रही हैं।

तेरे नहीं मेरे “खंडूड़ी”

बीजेपी का मानना है कि बीसी खडूड़ी बीजेपी के सिपाही रहे और हमेशा से बीजेपी के साथ रहे हैं। बीजेपी नेता शादाब शम्स कहते है कि वे बोल चुके है कि जरुरत पड़ी तो वे अपने बेटे के खिलाफ भी प्रचार करेगें। वहीं कांग्रेस का दावा है कि खंडूड़ी अपने बेटे के साथ होगें क्योकि बाप हमेशा बेटे का साथ देता हैं। कांग्रेसी नेता राजेंद्र शाह कहते है कि मुकाबला एकतरफा है खंडूडी जी ने कहा होगा लेकिन मनीष ने अपने पिता से पूछकर सियासत में कदम रखा हैं।

ठाकुर—ब्राहमण पर खडूड़ी भारी

राजनितिक जानकार और वरिष्ठ पत्रकार जय सिंह रावत का मानना है कि खडूड़ी अपने बेटे के साथ ही जायेगें। उनके अनुसार मनीष ने अपने पिता से पूछकर ही कांग्रेस में शामिल हुए हैं। यही नहीं खडूडी जी ने यह भी माना कि मनीष बहुत ही काबिल है। वे बताते है कि तीर्थ सिंह रावत के मैदान में आते ही इस सीट पर ठाकुर ब्रहामण समीकरण बनेगा। जो हमेशा की तरह खंडूड़ी के ही पक्ष में रहेगा। जय सिंह रावत के अनुसार इससे पहले भी बीसी खंडूडी के सामने जब जब इस सीट पर सतपाल महाराज आये। तो ठाकुर—ब्राहमण समीकरण मे ठाकुर को ही मुंहकी खानी पड़ी।

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