मंत्री-विधायकों पर रहम तो कर्मचारीयों पर ये सख्ती करने जा रही सरकार

मंत्री-विधायकों पर रहम तो कर्मचारीयों पर ये सख्ती करने जा रही सरकार

देहरादून(अरुण शर्मा)। उत्तराखंड में सभी मंत्री-विधायकों ने अपनी संपत्ति का ब्यौरा भले ही सार्वजनिक ना किया हो लेकिन डबल इंजन की ये सरकार राज्य के सरकारी कर्मचारियों की संपत्ति को लेकर सख्ती बरतने के मूड में है। जानकारों की माने तो सूबे की त्रिवेन्द्र सरकार अब राज्य के सरकारी कर्मचारियों का भी संपत्ति ब्यौरा लेने की तैयारी में है। जिसकी पूरी तैयारी त्रिवेन्द्र (tsr) सरकार ने कर ली है।

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उत्तराखंड (uttrakhand) में सत्ता पर काबिज होने के बाद त्रिवेन्द्र सरकार ने जोर शोर के सााथ ये नारा लगाया था की उनकी सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ेगी और उत्तराखंड को भ्रष्टाचार मुक्त करने के लिए अपने आपको झोक देगी और इसी तर्ज पर त्रिवेन्द्र सरकार ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों से संपत्ति का ब्योरा अनिवार्य रूप से तलब करने की तैयारी कर ली है। बता दें राज्य कर्मचारियों की आचरण नियमावली 2002 में अचल संपत्ति के संबंध में नियम 22 (3) में यह व्यवस्था की गई थी कि प्रथम नियुक्ति के समय और फिर पांच साल बाद प्रत्येक कर्मचारी अपने नियुक्ति प्राधिकारी के समक्ष निर्धारित प्रारूप में अपनी संपत्ति के ब्योरे की घोषणा करेगा।

भले ही त्रिवेन्द्र सरकार अपने इस फैसले को सराहनीय फैसले के तौर पर देख रही हो लेकिन विपक्ष ने इसको लेकर सरकारी की घेराबंदी शुरू कर दी है। विपक्ष का कहना है की सरकार के खुद के विधायकों ने अपनी संपत्ति का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं किया है जो खुद ही सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति पर सवाल खड़ा करती है। कांग्रेस का कहना है कि उत्तराखंड की हालत बदहाल है खनन, आबकारी, स्वास्थ्य जैसे विभागों में घोटाले हो रहे हैं ।

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