हरिद्वार रूड़की विकास प्राधिकरण
 

हरिद्वार(कमल खड़का)। हरिद्वार रूड़की विकास प्राधिकरण पिछले माह जारी किये ध्वस्तीकरण के आदेश एक बार फिर लटकता हुआ नजर आ रहा हैं। ऐसा नहीं यह पहली बार हुआ हो। इससे पूर्व में भी दर्जनों ऐसे धवस्तीकरण के आदेश फाइलों की शोभा बढ़ा रहे हैं। कनखल पहाड़ी बाजार स्थित रूईयां धर्मशाला में अवैध प्लाटिंग के खिलाफ धवस्तीकरण का आदेश तो ताजा उदाहरण मात्र हैं। हर की पैड़ी पर ही बना अवैध होटल प्राधिकरण को मुंह चिढ़ा रहा हैं। जिसमें प्राधिकरण ने 2009 में होटल के अवैध हिस्से को गिराने का आदेश दिया था। लेकिन अन्य आदेशों की तरह ही यह आदेश भी फाइलों तक सीमित हो गया हैं। ऐसे में प्राधिकरण की मंशा पर सवाल खड़ा होता हैं।

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हरिद्वार रूड़की विकास प्राधिकरण के लिए अवैध निर्माण पर धवस्तीकरण का आदेश को केवल फाइलो तक ही सीमित रखना हो गया हैं। हाल ही में रुईयां धर्मशाला में अवैध प्लाटिंग के खिलाफ जारी धवस्तीकरण के आदेश जारी होने के एक माह बीत जाने के बाद भी कार्यवाही नहीं हो पायी हैं। ऐसा नही है इस तरह का यह पहला मामला हो इससे पहले भी प्राधिकरण हरिद्वार हरकी पैड़ी क्षेत्र के सुभाष घाट पर होटल के अवैध निर्माण को गिराने के आदेश जारी कर चुका हैं। लेकिन नौ साल बीत जाने के बाद भी इस आदेश पर कार्यवाही नहीं हो पायी हैं । धर्मनगरी में ऐसे दर्जनो मामले ऐसे है जिसमें प्राधिकरण ने धवस्तीकरण के आदेश तो जारी किये लेकिन ये आदेश केवल फाइलों की शोभा बढ़ाने वाले ही साबित हुए।

हर की पौड़ी पर प्राधिकरण को मुंह चिढ़ाता होटल

जानकारी के अनुसार हर की पौड़ी स्थित 2006 मे बनाये गये होटल पर प्राधिकरण ने कई सवाल खड़े किये थे। होटल हैवनस नाम के इस होटल पर प्राधिकरण ने बिना नक्शा पास कराये कराये निर्माण करने का आरोप लगाया । इसी पर कार्यवाही करते हुए प्राधिकरण ने दो बार होटल भी सील की कार्यवाही की गयी। प्राधिकरण अपनी कार्यवाही करता रहा और होटल का अवैध निर्माण भी उससे तेज गति से होता रहा। काफी गतिरोध के बाद हरिद्वार रूड़की विकास प्राधिकरण समिति का निष्कर्ष निकाला कि गंगा नदी तट से 200 मीटर की परिधि के अंतर्गत निर्माण की अनु मान्यता हेतु निर्गत शासनदेश के अनुसार मात्र मंदिर मठ आश्रम का निर्माण ही क़ातिपये शर्तो के अनुसार अनु मान्य है निर्माण कर्ता द्वारा होटल हेवनस का निर्माण एवं संचालन उक्त शासनादेश के विरुद्ध है

हरिद्वार विकास प्राधिकरण का आदेश

हरिद्वार विकास प्राधिकरण के तत्कालीन सचिव रणवीर सिंह चौहान ने उधघोषित एवं हस्ताक्षरीतकर दिनांक 19. 8. 2009 को आदेश दिया की विपक्षी ने तृतीय तल एवं चतुर्थ तल पर अवैध निर्माण किया है प्रसन्नगत निर्माण गंगा नदी तट से 200 मीटर के अंतर्गत होने के कारण समनिय भी नहीं है तथा उपरोक्त समस्त निर्माण अवैध है विपक्षी को आदेशीत किया जाता है की तृतीय तल एवं चतुर्थ तल पर निर्मित समस्त निर्माण को आदेश प्राप्त होने की तिथि से 30 दिन की अवधि मे स्वयं ध्वसत कर ले अन्यथा समय अवधि समाप्त होने के बाद अवैध निर्माण हरिद्वार विकास प्राधिकरण द्वारा धवसत किया जायेगा ध्वास्तीकरण पर होने वाले वेय की वसूली भू राजस्व की भाती विपक्षी से धारा 40 के अधीन वसूली जाएगी

 

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