हरिद्वार लोकसभा सीट-ग्रामिणों का सवाल विकास तो दूर,सांसद को नहीं देखा,कैसे दें वोट ?

हरिद्वार लोकसभा सीट-ग्रामिणों का सवाल विकास तो दूर,सांसद को नहीं देखा,कैसे दें वोट ?

सुल्तानपुर(नाथीराम कश्यप)। चुनावी बयार में भूले मूलभूत सुविधाओं का मुददा। चुनाव में इस समय भाजपा के रमेश पोखरियाल निशंक अपने पांच साल के संसदीय र्कायकाल में विकास की बात को लेकर जनता के दरबार में हैं। निशंक के दावों से अलग टांडा भागमल गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं की बाट जोह रहा हैं। इस बार ग्रामीण नेताओं के वादें को नहीं अपनी समस्याओं को दूर करने वालें प्रत्याशी को वोट देने का मन बना लिया हैं। बहरहाल मौजूदा समय में बीजेपी के लिए हरिद्वार के ग्रामिण इलाकों से अच्छी खबर नहीं हैं।

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हरिद्वार लोकसभा सीट का चुनावी महासंग्राम ग्रामिण इलाकों के वोटरों पर हक जमाने को लेकर लड़ा जा रहा हैं। मौजूदा समय में सुल्तानपुर क्षेत्र स्थिति टांडा भागमल गांव में करीब साढ़े तीन हजार की आबादी निवास करती है। बीजेपी के पूर्व के सांसद के कार्यकाल में विकास के नाम पर यहां के ​लोग केवल कुछ तस्वीरों की ओर इशारा करते हुए विकास की कहानी बयां कर देते हैं।

अशोक सरदार का कहना है कि यह गांव आजतक मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। इस गांव का मुख्य मार्ग आजतक बदहाल अवस्था में है। पवन कुमार कुमार बताते है कि विकास कार्यों के नाम पर इस गांव का आज तक मुख्य मार्ग भी नहीं बन पाया है। करीब 2 किलोमीटर लंबा गांव का यह मुख्य मार्ग पूरी तरह से क्षतिग्रस्त पड़ा है।

रविन्द्र सिंह, रकम सिंह,विपिन, सोनू कुमार,रोशन, परमजीत सिंह आदि ग्रामीणों का कहना यही है कि गांव के इस मुख्य मार्ग में जलभराव की समस्या बनी हुई है। जिससे ग्रामीणों को आवागमन में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

कुलदीप सिंह ने बताया कि इस गांव में ओवरहेड टैंक नहीं लग पाने की वजह से ग्रामीणों को हैंडपंप के दूषित पेयजल के लिये मजबूर होना पड़ रहा है। अर्जुन सिंह का कहना है कि यह गांव गंगा तटबंध के किनारे स्थित है। जिसके चलते अधिकांश ग्रामीणों की जीविका गंगा में होने वाले सरकारी खनन चुगान से चलती है।

पिछले काफी समय से गंगा में खनन चुगान शुरू नहीं होने पर ग्रामीण रोजगार से वंचित है। अनुज कुमार का कहना है कि चुनाव के दौरान बड़े-बड़े वायदे करने वाले नेता जीत हासिल करने के बाद अपने वायदे भूल जाते हैं, और जनता की ओर ध्यान नहीं देते। इस बार लोकसभा चुनाव में ग्रामीण अपना वोट उसी प्रत्याशी को देंगे, जो ग्रामीणों की समस्या का समाधान करेगा।

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