हरिद्वार (विकास चौहान)। हरिद्वार स्थित हर की पौड़ी (Har Ki Pauri)  पर बने राजा मानसिंह की छतरी का मामला अब न्यायालय से होते हुए हरिद्वार विकास प्राधिकरण पहुंच गया है। हाल ही में हरिद्वार विकास प्राधिकरण को हाई कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि हर की पौड़ी (Har Ki Pauri)  पर बने अर्धनिर्मित राजा मानसिंह की छतरी का तकनीकी विशेषज्ञयो की राय लेकर पुराने स्वरूप में ही बनाया जाए। इसी को लेकर आज हरिद्वार विकास प्राधिकरण के वीसी और तकनीकी विभाग के अधिकारियों ने मंदिर का निरीक्षण किया। दरअसल मंदिर का स्वरूप बदलने को लेकर मन्दिर के प्रबंधक और गंगा सभा के बीच करीब 20 साल से ये मामला कोर्ट में चल रहा है।

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मंदिर के निरक्षण के बाद हरिद्वार विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष दीपक रावत ने बताया के माननीय हाई कोर्ट के निर्देश के बाद आज पक्षकारों और तकनीकी विभाग के अधिकारियों की टीम के साथ राजा मान सिंह की छतरी जिसे लोग गंगा मंदिर भी कहते है उसका निरीक्षण किया गया है, जिसका हमारे द्वारा ये निरिक्षण किया गया है कि क्या इस मंदिर को मूल स्वरूप में बदला जा सकता है या मूल रूप में नही बदला जा सकता है। तो उसी ही तरह का नया स्वरूप बना कर कैसे इस मंदिर का सौन्दर्यकरण किया जा सकता है इसको लेकर एक बार फिर गंगा बन्दी के समय निरीक्षण किया जाएगा। फिर जो विशेषज्ञों को राय लेकर मंदिर का निर्माण करवाया जाएगा।

दूसरी ओर गंगा सभा जो तीर्थ पुरोहितों की सर्वोच्च संस्था का मानना है कि मंदिर के पुजारियों द्वारा उसको हटाकर अब इसको मानसिंह की छतरी का रूप में रूप दिया जाएगा। यह कार्य अभी संभव नहीं है यह कार्य गंगा बंदी के समय संभव हो पाएगा ।
एचआरडीए के वीसी दीपक रावत द्वारा निरीक्षण के बाद इस मंदिर का विवाद जल्द सुलझने के कयास लगाये जा रहे है।

 

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