हरिद्वार। कोरोना जैसी महामारी ओर हलकान होती जनता। लॉकडाउन से एक प्रकार का अघोषित कर्फ्यू। इन सबके बीच इससे फायदा भी उठाने वाले पीछे नही रहे। शराब की तस्करी से जहां 44 ठेको से शराब गायब हो गई वहीं हरिद्वार की फिजाओं में एक पत्रकार का नाम तेज़ी से तैर रहा है। तहजीब वाले इन पत्रकार महोदय ने अपने पत्रकारीय रसूखों का प्रयोग कर खूब शराब का कारोबार किया। यूँ तो लोगो के हलक तर करने में इन्होंने अदब का परिचय दिया परंतु यह काम इतना व्यापक स्तर पर किया गया कि अधिकारियों की पेशानी पर ही बल पड़ गए। फिर क्या था मदिरा अधिकारी ने महोदय को फोन घुमा दिया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार अधिकारी और पत्रकार के बीच हुई टेलीफोनिक बातचीत इस प्रकार है —
अधिकारी– हेल्लो , पत्रकार मोहदय मैं बोल रहा हु।
पत्रकार — जी, भाई साहब
अधिकारी-– भाई साहब , आपके द्वारा कई ठेकों से मेरा नाम लेकर शराब की पेटियां उठाई जा रही है।
पत्रकार– नही नही भाई जी।
अधिकारी-– मोहदय हमे सब जानकारी है ओर यह भी की पेटियां कहा रखी जा रही है।
पत्रकार– नही नही भाई जी ऐसा कुछ नही है।
अधिकारी– देखिये भाई जी ये सब छोड़ दो नही तो कार्यवाही को मजबूर होना पड़ेगा।

इसके बाद भी जब उक्त पत्रकार मोहदय नही माने तो अधिकारी को अपने ठेकेदारों को फ़ोन कर समझना पड़ा।
हेल्लो मैं आबकारी अधिकारी बोल रहा हु, जी सर , अरे वो पत्रकार मेरे नाम से शराब ले रहा है मत देना उसको।, वो शराब बेच रहा है पत्रकारिता नही कर रहा। मेरा उससे कोई रिश्ता नही है।

 

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