पहाड़ की तंदूरी चाय का आनंद
 

देहरादून(अरुण शर्मा)। पहाड़ पर तंदूरी चाय का आनंद लेना हो तो चले आइए उत्तराखंड।

पहाड़ की ठंडे ठंडे मौसम के बीच गुनगुनी धूप में बैठकर पहाड़ की तंदूरी चाय का आनंद के गुना बढ़ जाता है।

आपको बता दे कि राजस्थान महाराष्ट्र व कई जगहों पर तंदूरी चाय का चलन है।

पहाड़ की तंदूरी चाय का आनंद
पहाड़ की तंदूरी चाय का आनंद

अब उत्तराखंड के मसूरी व रामनगर में भी आप तंदूरी चाय का आनंद ले सकते है।

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कॉर्बेट पार्क के अंतर्गत पड़ने वाले रिंगोड़ा गांव में,जहाँ आपको स्वादिस्ट तंदूरी चाय पीने को मिलेगी।
कुछ इस तरह बनती है तंदूरी चाय….
तंदूरी चाय को बनाने का बड़ा ही अनोखा तरीका है। सबसे पहले कुल्‍हड़ों को तंदूर में गर्म किया जाता है।
इसके बाद फिर आधी पकी चाय को उस गर्म कुल्‍हड़ में डालते हैं। इससे उनमें झाग बनता है।
गर्म कुल्‍हड़ के कारण चाय में स्‍मोकी खुशबू आ जाती है।
रामनगर के रिंगोड़ा गांव में इन दिनों ये तंदूरी चाय पर्यटकों की पहली पसंद बनती जा रही है।
कोर्बेट पार्क घूमने आने वाले पर्यटक रिंगोड़ा में रुककर इस तंदूरी चाय का लुप्त उठाना नही भूल रहे।
पहाड़ की तंदूरी चाय को रिंगोड़ा गांव में बनाने वाले 4 से 5लोग  है।
जिससे यहां रिंगोड़ा गांव के युवा खुद रोजगार से जुड़कर रोजगार दे भी रहे है,इस चाय की वजह से आज रिंगोड़ा गांव एक लग पहचान बनाता जा रहा है।
वही तंदूरी चाय बना रहे प्रकाश कांडपाल कहते है कि पर्यटक हमारे गांव रिंगोड़ा में इस चाय को पीने के लिए दिल्ली, मुम्बई,मुरादाबाद आदि जगह से आते है।
हम अपनी तंदूरी चाय में लांग इलाइची अदरक,और चीनी और गुड़ का  इस्तेमाल करते है।
 नेचर गाइड इमरान खान कहते है कि रिंगोड़ा गांव वालों ने  स्वरोजगार की एक बहुत अच्छी पहल की है और वाइल्डलाइफ टूरिज्म के जरिए यह शुरुआत हो रही है।
रिंगोड़ा गांव जंगल से लगता हुआ गांव है, इससे ये गांव भी फेमस होता जा रहा है।
हालांकि अभी वह खाता है जंगल से लगा हुआ गांव है और वहां के लोग इस तरीके का रोजगार कर रहे हैं ना उन्होंने कोई सहायता सरकार से ही ली है।
उन्होंने अपने आप अपना सब कुछ इन्वेस्टमेंट करके आज रोजगार से जुड़ गए हैं और लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं तो यह बहुत अच्छी पहल है।
 

By admin

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